अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। लंबे समय से चल रहे गतिरोध के बाद आखिरकार रानी लक्ष्मीबाई अर्बन कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के सभापति पद पर भाजपा के वरिष्ठ नेता मनु सिंह अपना परचम लहराने में कामयाब रहे। उनके खिलाफ किसी के पर्चा न दाखिल करने से उनको निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। उनके निर्वाचित होते ही समर्थकों ने फूल-मालाओं से लाद दिया। वहीं, उपसभापति पद पर भी भाजपा के संजय अग्रवाल जीत हासिल करने में कामयाब रहे।
जनवरी माह से इस पद को लेकर पार्टी में गतिरोध छिड़ा था। आलाकमान के दखल के बाद मनु सिंह के नाम पर मुहर लगी। बुधवार को चुनाव प्रक्रिया आरंभ होने पर मनु सिंह के संग नामांकन के लिए एमएलसी बाबूलाल तिवारी, पूर्व महापौर रामतीर्थ सिंघल, महानगर अध्यक्ष मुकेश मिश्र समेत अन्य पदाधिकारी कोऑपरेटिव पहुंचे। मनु के पर्चा दाखिल करने के बाद किसी अन्य उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल नहीं किया। किसी अन्य का नामांकन दाखिल न होने से चुनाव अधिकारी ने उनको निर्विरोध सभापति निर्वाचित घोषित कर दिया।
बता दें कि जनवरी माह में अर्बन बैंक का चुनाव कराया गया था। इसके सभी 12 डायरेक्ट पदों पर भाजपा उम्मीदवार विजयी रहे थे लेकिन, सभापति पद को लेकर अंदरखाने में खींचतान शुरू हो गई। पार्टी में मचे घमासान के चलते चुनाव दो बार टालना पड़ा। करीब चार महीने तक यह अटका रहा। पार्टी आलाकमान के दखल के बाद अमित चिरवारिया, पुरुषोत्तम स्वामी, मनु सिंह एवं रमाकांत दुबे के नाम का पैनल तय हुआ। अंत में मनु सिंह के नाम पर सहमति बनी। इसके बाद मनु के निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया। उनके निर्वाचित घोषित होने पर भाजपा नेताओं ने मिठाई बांटकर हर्ष जताया।
बैंक के कामकाज को सुधारना पहली प्राथमिकता: मनु
सभापति निर्वाचित होने के बाद अपनी प्राथमिकताएं गिनवाते हुए मनु सिंह ने कहा कि सहकारी व्यवस्था के मुताबिक बैंक के कामकाज को सुधारना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। बैंक की वित्तीय सेहत भी दुरुस्त करने के उपाय किए जाएंगे। बैंक आधुनिक तरीके से कामकाज करे इसकी भी कोशिश की जाएगी। बैंक के जरिए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया जाएगा। बता दें कि मनु सिंह नगर निगम के चुनाव प्रबंधन प्रमुख रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने काफी समय तक संगठन का भी काम किया है।
उपसभापति के पद में फंसा पेच
उपसभापति पद पर कब्जा जमाने को लेकर भाजपा नेता ही एक दूसरे के सामने आ गए। नामांकन प्रक्रिया आरंभ होते ही पंकज दुबे, संजय अग्रवाल एवं उमा गांधी ने पर्चा खरीद लिया। उनके पर्चा खरीद लिए जाने से चुनाव होने की संभावना बन गई। पार्टी पदाधिकारियों भी समझौता होता न देख पशोपेश में फंस गए लेकिन, काफी देर की मशक्कत के बाद किसी तरह पंकज और उमा पर्चा दाखिल न करने पर राजी हो गए। इसके बाद संजय भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
