झांसी। बेतवा नदी पर बने झांसी मंडल के सबसे पुराने बांध पारीछा का पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट अधर में फंस गया। केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के जरिये इस बांध की डिजाइन समेत गेट बदल जाने का प्रस्ताव था। इसकी मदद से बांध में स्टोरेज क्षमता भी बढ़ाई जानी थी।

यह प्रोजेक्ट अंतिम मंजूरी के लिए अप्रैल माह में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को भेजा गया था, लेकिन उसकी मंजूरी न मिलने से पूरा प्रोजेक्ट अब छह माह के लिए पिछड़ गया। सिंचाई अफसरों ने विधानसभा चुनाव के बाद ही प्रोजेक्ट के आरंभ होने की उम्मीद जताई है।

करीब 150 साल पुराने पारीछा बांध बुंदेलखंड में सिंचाई व्यवस्था की अहम कड़ी है। बांध के काफी पुराना हो जाने से गेट समेत उसमें कई सुधार किए जाने की गुजाइंश है। इसको देखते हुए इसके पुनर्निर्माण की आवश्यकता महसूस हुई। वर्ष 2024 में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट की उच्चस्तरीय तकनीकी समिति ने बांध के नवीनीकरण कार्यों को मंजूरी दे दी। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराया गया।

इसके तहत पुराने फॉलिंग शटर, स्लूज गेट और बांध की अन्य संरचनाओं की मरम्मत कराई जानी थी। इस पर करीब 3 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव था। इसके जरिये गेट बदलने जैसे अहम कार्य कराए जाने थे। इससे बांध की स्टोरेज क्षमता में इजाफा होना था। प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए केंद्रीय जल आयोग को भेज दिया गया, लेकिन अब तक इसकी मंजूरी न मिलने से काम शुरू नहीं हो सका। मुख्य अभियंता देवेश शुक्ला का कहना है कि मंजूरी मिलने के बाद ही यहां काम आरंभ कराया जा सकेगा।



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