अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। पारीछा थर्मल पावर प्लांट अफसरों के गले में तेरह साल पुराना मामला फांस बन गया। पावर प्लांट मेंं वर्ष 2011 के दिसंबर माह से तीन माह तक एक यूनिट बंद कर दी गई थी। इस दौरान बिजली उत्पादन पूरी तरह ठप रहा। इससे सरकारी खजाने को करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक नुकसान होने की आशंका है। सरकार ने इस मामले की विजिलेंस से जांच शुरू कराई लेकिन, करीब एक साल बीतने के बाद भी तत्कालीन पावर प्लांट अफसर प्लांट बंद करने की ठोस वजह नहीं बता सके। वहीं, विजिलेंस ने तत्कालीन अफसरों से पूछने को 22 सवालों की प्रश्नावली भी तैयार की। इनके अधिकांश सवालों का जवाब विजिलेंस को अभी तक नहीं मिला।

विद्युत उत्पादन इकाई में दिसंबर 2011 से मार्च 2012 तक 210 मेगावाट क्षमता की एक यूनिट बंद कर दी गई थी। इसके बंद होने से प्लांट का विद्युत उत्पादन घटकर 930 मेगावाट पहुंच गया। तीन माह तक बिजली उत्पादन न होने से करीब 50 करोड़ के नुकसान की आशंका है। इसकी शिकायत उस दौरान हुई थी लेकिन, करीब ग्यारह साल तक पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। वर्ष 2022 में शासन ने विजिलेंस को पूरे मामले के जांच के निर्देश दिए। इसके बाद से विजिलेंस टीम पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुटी है। विजिलेंस ने उस दौरान तैनात रहे महाप्रबंधक, मुख्य अभियंता समेत कुल 40 कर्मचारियों के ब्यौरे जुटाए। इन सभी को नोटिस जारी करके प्लांट बंद करने को लेकर सवाल पूछे। इनमेें कई तकनीकी सवाल भी थे लेकिन, इनमें से किसी सवाल का जवाब देने को अधिकारी एवं कर्मचारी राजी नहीं हैं। विजिलेंस अफसरों का कहना है इनके लिए प्रश्नावली भी तैयार की गई है। वहीं, एसपी आलोक शर्मा का कहना है कि जांच-पड़ताल की जा रही है। कई लोगों को नोटिस भेजी गई है।



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