अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। प्रमुख ट्रेनों के स्लीपर कोचों का हाल इन दिनों जनरल डिब्बों जैसा बना हुआ है। अनारक्षित यात्री स्लीपर कोचों की सीटों पर कब्जा जमाए रहते हैं, जिससे अक्सर रिजर्वेशन कराकर यात्रा करने वालों को अपनी बर्थ तो छोड़ो बैठने के लिए जगह तक नहीं मिल पाती है। यात्रियों की ओर से लगातार शिकायतें आने के बाद भी रेल प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
हजरयाना निवासी सौरभ ने गाड़ी संख्या 11123 ग्वालियर-बरौनी मेल से झांसी से लखनऊ जाने के लिए एक महीने पहले स्लीपर में रिजर्वेशन कराया था। उनकी सीट कंफर्म हो गई थी। रविवार को दोपहर पौने दो बजे ट्रेन के झांसी आने पर जब वे अपने कोच में पहुंचे तो उनकी बर्थ पर पहले से पांच यात्री बैठे हुए थे। सौरभ के रिजर्वेशन दिखाने के बाद भी वे उठने को तैयार नहीं हुए। मुश्किल से उन्हें कोच की दूसरी बर्थ पर बैठने भर की जगह नहीं मिल पाई। यह एक यात्री या एक ट्रेन की बात नहीं है, बल्कि ज्यादातर प्रमुख ट्रेनों के स्लीपर कोचों का इन दिनों यही हाल बना हुआ है। यात्रियों की ओर से रेल प्रशासन से लगातार शिकायतें की जाती हैं। बावजूद, स्थिति में सुधार नहीं आ रहा है। रेलवे के पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इन दिनों सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। स्लीपर कोचों में अनारक्षित यात्रियों के मिलने पर उनसे जुर्माना वसूला जा रहा है।
