– हाई बीपी, एनीमिया ग्रस्त मां होने से 50 फीसदी बच्चे डेढ़ किलो से कम वजन के पैदा हो रहे

– मेडिकल कॉलेज में हुए अध्ययन में डेढ़ किलो से कम के 73 फीसदी नवजात मिले बीमार

अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। बुंदेलखंड में डेढ़ किलो से कम वजन के 73 फीसदी नवजात पीलिया, ब्रेन हेमरेज, आंत और खून में संक्रमण होने से लेकर सांस रोगों का शिकार हो जाते हैं। चूंकि, झांसी में हर साल करीब तीन हजार अति कम वजनी बच्चे पैदा होते हैं। ऐसे में 2200 किसी न किसी बीमारी का शिकार हो जाते हैं। मेडिकल कॉलेज में हुए अध्ययन में ये बात सामने आई है।

झांसी समेत बुंदेलखंड में महिलाओं में खून की कमी बड़ी समस्या है। मेडिकल कॉलेज में पूर्व में हुए अध्ययन में 70 फीसदी गर्भवती महिलाओं के एनीमिया की चपेट में होनी की पुष्टि हो चुकी है। अब कॉलेज में भर्ती झांसी समेत बुंदेलखंड के अति कम वजनी सौ बच्चों पर अध्ययन किया गया। इन सभी का वजन जन्म के समय 1.5 किलो से कम था। 50 फीसदी अति कम वजनी बच्चे पैदा होने की अहम वजह माताओं का एनीमिया ग्रस्त और ब्लड प्रेशर बढ़ा होना है। स्टडी के गाइड डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि 36 नवजात शिशुओं की मां में स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं मिली। 33 माताओं में खून की कमी की बात सामने आई। 17 महिलाओं का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ मिला। छह महिलाओं की बच्चेदानी का पानी कम था। चार महिलाओं के जुड़वा बच्चे हुए और चार का समय से पहले प्रसव हुआ। इन कारणों से बच्चे कम वजनी रह गई। सामान्य महिलाओं के भी बच्चों का वजन डेढ़ किलो से कम होने का कारण गर्भावस्था के दौरान अच्छा पोषण न मिलना, बच्चेदानी की बनावट में दिक्कत आदि हो सकता है। उन्होंने बताया कि अति कम वजनी 73 फीसदी बच्चों में पीलिया से लेकर सांस की बीमारी मिली। कुछ बच्चे तो दो या उससे अधिक बीमारी की चपेट में आ गए। ऐसे में गर्भवती महिला के पोषण का ध्यान रखना चाहिए। एनीमिया से लेकर ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि झांसी में करीब तीन हजार अति कम वजन के बच्चे पैदा होते हैं। इस अध्ययन में नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. आराधना कनकने, डॉ. अनुज सेठी, डॉ. रजनी गौतम, डॉ. सपना गुप्ता, डॉ. कंवलप्रीत, डॉ. विश्वदीपक शामिल रहे। पिछले सप्ताह नैनीताल में हुई यूपी पेडिकॉन-2023 कांफ्रेंस में इस शोध पत्र को आरएस दयाल स्वर्ण पदक भी मिल चुका है।

ये रही बीमारी की स्थिति

– चार फीसदी में ह्रदय की बीमारी

– छह प्रतिशत में ब्रेन हेमरेज

– सात फीसदी में सांस बार-बार रुकना

– 11 प्रतिशत में आंत का संक्रमण

– 13 फीसदी में सांस संबंधी रोग

– 18 फीसदी में खून का संक्रमण

– 65 फीसदी शिशु पीलियाग्रस्त थे

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विशेषज्ञों के मुताबिक जन्म के समय नवजात का वजन 2.5 से 3.5 किलोग्राम होना चाहिए। ढाई किलो से कम का बच्चा कम वजन की श्रेणी में आता है। जबकि, 1.5 किलो से कम का बच्चा अति कम वजन की श्रेणी में आता है। जबकि, किसी व्यक्ति का नौ ग्राम से कम हीमोग्लोबिन एनीमिया की श्रेणी में आता है।



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