बुखार, खांसी-जुकाम हुए तीन दिन हो गए हैं तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। इन दिनों निमोनिया बच्चे को ही नहीं, बड़ों को भी जकड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन और बाल रोग विभाग की ओपीडी में 60 फीसदी से ज्यादा रोगी इसके ही आ रहे हैं। इनमें से 27 फीसदी में निमोनिया की पुष्टि हो रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि हवा में आर्द्रता काफी है। तापमान भी तेजी से बदल रहा है। ऐसे वातावरण में वायरल का हमला बढ़ गया है। इससे लोग बुखार, खांसी-जुकाम, श्वास नली में संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के डॉ. जकी सिद्दीकी की कहना है कि वर्तमान में चल रहे मौसम में सावधानी बेहद जरूरी है।

मलेरिया व डेंगू जैसे दिख रहे लक्ष्ण

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नूतन अग्रवाल ने बताया कि तेज बुखार, शरीर में दर्द, समय अंतराल में तेज बुखार के रोगी आ रहे हैं। कई रोगियों की जांच में प्लेटलेट्स कम मिल रहे हैं। ये लक्षण डेंगू या मलेरिया के हैं। कई रोगियों को भर्ती करके उपचार किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए रोगी तब आता है, जब स्थानीय स्तर पर उपचार करा लेता है। स्थानीय डॉक्टर लक्षण के आधार पर मलेरिया या डेंगू की दवा दे देते हैं, ऐसे में जांच कराने पर पुष्टि नहीं होती है।

बढ़ा रहा सेप्सिस, भर्ती हो रहे 29-30 रोगी

बारिश के मौसम में एक पखवाड़े से सेप्सिस रोगियों की संख्या बढ़ गई है, जो आमतौर पर मेडिकल कालेज में इक्का-दुक्का ही आते थे। डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज के लोगों में बुखार, पेट संक्रमण होने आदि से सेप्सिस का खतरा बढ़ जाता है। अब मेडिसिन विभाग में रोजाना करीब सेप्सिस के रोगी आ रहे हैं। वहीं, सर्जरी विभाग में भी सेप्सिस रोगी बढ़ गए हैं। डॉ. राजकुमार वर्मा व डॉ. आकाश गुप्ता ने बताया कि बैक्टीरिया संक्रमण से सेप्सिस हो रही है। इसका खतरा सबसे ज्यादा डायबिटीज रोगी में होता है। इन दिनों 10-12 रोगी रोजाना भर्ती हो रहे हैं। वहीं, बुंदेलखंड केमिस्ट एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष विनय उपाध्याय तथा झांसी केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव नितिन मोदी ने बताया कि बुखार, खांसी-जुकाम, एलर्जी व एंटीबायोटिक दवाओं की मांग 40 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है।



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