जल जीवन मिशन (ग्रामीण) पांच साल बाद भी पानी की तीन परियोजनाएं पूरी नहीं कर सका। आला अफसरों के कई अल्टीमेटम देने के बावजूद ये जल परियोजनाएं अभी तक हवा में ही अटकी हैं। कई बार डेडलाइन दी गई, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। अब नई डेडलाइन सितंबर तय हुई है। एजेंसी के काम की रफ्तार देखते हुए इस माह तक भी काम पूरा होने की गुंजाइश बेहद कम है। जल परियोजनाओं के अधूरा होने से दो सौ से अधिक गांवों के लोग पीने के पानी से वंचित हैं।
सात बार बढ़ाई जा चुकी डेडलाइन
केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने पांच साल पहले साझा तौर पर हर घर नल योजना के जरिये घर-घर पानी पहुंचाने की कवायद शुरू की थी। करीब 1,465 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना की मदद से 613 गांव के 2.09 लाख घरों तक पानी पहुंचाया जाना था, लेकिन काम की रफ्तार ऐसी कि पांच साल बाद भी करीब 35 फीसदी काम अधूरा पड़ा है। जल निगम ग्रामीण अफसरों के लिए इमलौटा, टेहरका एवं बरधरी की जल परियोजनाएं सबसे बड़ी परेशानी बनी हैं। इनका काम बृजगोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया था, लेकिन बेहद धीमी रफ्तार के चलते काम अभी तक अधूरा है। अफसरों ने काम में तेजी लाने के लिए मैन पावर बढ़ाकर 600 करने को कहा, लेकिन कंपनी ने इसे भी नहीं सुना। जल निगम अफसरों के मुताबिक इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अलग-अलग सात बार डेडलाइन बढ़ाई जा चुकी है। इस साल भी गर्मी आरंभ होने से पहले जल निगम अभियंता काम पूरा होने का दावा कर रहे थे, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। 228 गांवों के लोग अभी तक पानी का इंतजार कर रहे हैं। जिलाधिकारी मृदुल चौधरी ने सितंबर तक शत-प्रतिशत काम पूर्ण करते हुए समस्त घरों तक नल से जल पहुंचाने की बात कही है।
दस में से सात हो सकी पूरी
हर घर जल योजना के जरिये झांसी के लिए दस जल परियोजनाएं आरंभ की गई थीं। गुलारा, बचावली, लिलेथा, बुढ़पुरा, कुरेचा, पुरवा, व बढ़वार पूरी हो गई, जबकि इमलौटा, बरथरी व तेहराक अधूरी हैं। कहीं टेस्टिंग नहीं हो पा रही तो कहीं संयोजन अधूरा है। कई जगह पाइप बिछाने का काम भी पूरा नहीं हुआ है अब तक सिर्फ 385 गांव में ही पानी पहुंच सका है। 228 गांव के लोग अब भी पानी का इंतजार कर रहे हैं।
भारी पड़ रही जल निगम की सुस्ती
जल निगम (ग्रामीण) के अभियंताओं की सुस्ती से परियोजना लगातार पिछड़ती जा रही हैं। जल निगम ग्रामीण को इस कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन फर्म पर नियंत्रण न रखने से काम की शुरुआत में ही लेटलतीफी का शिकार हो गया। बृजगोपाल कंपनी को सबसे अधिक गांव तक पानी पहुंचाना था। सबसे धीमी रफ्तार इसी फर्म की रही। इससे प्रोजेक्ट पिछड़ता गया। हालात यह हैं कि एक्सईएन रणविजय सिंह इस परियोजना की प्रगति के कुछ नहीं बता पाते। ग्रामीणों का भी कहना है कि एक्सईएन कभी फोन नहीं उठाते। इस वजह से समस्याएं भी नहीं सुलझ पातीं। सीएम के दौरे को देखकर अफसरों के होश फाख्ता हैं।