आगरा। पुरा जसोल गांव में 22 अगस्त की रात सिलिंडर से गैस रिसाव रोकने के दौरान आग की लपटों में घिरकर झुलसे जितेंद्र (44) को शनिवार की रात दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान रविवार की सुबह उपकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद रविवार की रात मृतक का शव घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। वहीं जितेंद्र को बचाने में झुलसे छह और लोगों को दिल्ली रेफर किया गया है।
पुरा जसोल गांव में 22 अगस्त की रात सिलिंडर से गैस रिसाव रोकने रसोई में गए जितेंद्र लपटों में घिर गए थे। आग की लपटों में घिरे जितेंद्र को बचाने में परिवार और पड़ोस के 14 लोग झुलस गए थे। सभी का इलाज चल रहा है। रूह कंपा देने वाले हादसे के बाद पुरा जसोल गांव में मातम पसरा है। गांव के लोग हृदय विदारक हादसे के मंजर के जिक्रभर से कांप जाते हैं। आग से झुलसे देवेंद्र प्रताप, आनंद प्रताप, प्रीती, कुमकुम के बाद जितेंद्र के पिता भागीरथ, उमाशंकर एवं उनकी पत्नी चंद्रावती, बेटा अभिलाष, केसर देवी और उनके बेटे सुरेंद्र को भी एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सदमे में पत्नी, चार बच्चों की परवरिश बनी चुनाैती
आग से झुलसे भागीरथ जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। उनके बेटे जितेंद्र की मौत हो गई। जितेंद्र की माैत से पत्नी संगीता सदमे में हैं। जितेंद्र अपने पिता के साथ खेती कर परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। जितेंद्र के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। संगीता के सामने तीन बेटियों कुमकुम (15), दिव्या एवं नव्या (13) और बेटा शिवम (17) की परिवरिश की पहाड़ सी चुनौती है। उसे नहीं सूझ रहा कि बेटे-बेटियों की परिवरिश कैसे होगी। ससुर भागीरथ और बेटी कुमकुम का इलाज कैसे कराएगी। दोनों बेटी दिव्या के साथ हादसे में झुलस गए थे। गांव के लोग भी संगीता और उसके परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।