सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बने आवास में रविवार शाम प्रभारी चिकित्सा अधिकारी मृत अवस्था में जमीन पर पड़े मिले। स्वास्थ्य कर्मियों की सूचना पाकर माैके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला। बताया जा रहा है कि चिकित्सक करीब 20 घंटे से बाहर नहीं निकले थे। पुलिस घटना की जांच कर रही है। कर्मचारियों के अनुसार चिकित्सक का पत्नी से कई साल से विवाद चल रहा था।

कस्बा के सीएचसी पर पिछले 10 वर्षों से तैनात प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डाॅ. शशांक श्रीवास्तव (50) शनिवार की रात करीब 12 बजे मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर आवास पर चले गए थे। रविवार सुबह जब सफाई कर्मचारी आवास पर पहुंचा तो दरवाजा न खुलने पर वह वापस लौट आया। दिन भर जब डाॅ. शशांका आवास से बाहर नहीं आए तो स्वास्थ्य कर्मियों को चिंता हुई। उनके मोबाइल पर घंटी जा रही थी लेकिन कॉल रिसीव नहीं हो रही थी। शाम करीब साढ़े सात बजे दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया लेकिन कोई आवाज नहीं आई। कर्मचारियों ने खिड़की से झांककर देखा तो उनका शव जमीन पर पड़ा दिखा।

सूचना पर पहुंचे कस्बा चौकी इंचार्ज दीपक चौधरी ने दरवाजा तोड़कर चिकित्सक के शव को बाहर निकाला। वहीं कर्मियों ने सीएमओ डॉ. स्वदेश गुप्ता व एमओआईसी डाॅ. कुमारिल मैत्रेय को इसकी जानकारी दी। कर्मचारियों ने बताया कि डाॅ. शशांक का उनकी पत्नी से लंबे समय से विवाद चल रहा था। इससे वह लंबे समय से बीमार भी चल रहे थे। चिकित्सक मूलरूप से उत्तराखंड के देहरादून के निवासी बताए जा रहे हैं। उनके माता-पिता लखनऊ में रह रहे हैं। चिकित्सक की मौत से स्वास्थ्य कर्मियों में खलबली है। चिकित्सक के एक पुत्र व पुत्री है। प्रभारी निरीक्षक अजय अवस्थी ने बताया कि परिजन को सूचना दे दी गई है। पोस्टमार्टम के बाद मौत का कारण पता चलेगा। घटना की जांच की जा रही है।

13 साल पहले इसी आवास पर मृत मिला था लिपिक

गुरसहायगंज सीएचसी परिसर में बने इसी आवास में 13 साल पहले 2012 में लिपिक जगदीश चंद्र का शव भी पड़ा मिला था। वह मूलरूप से हरदोई जिले के रहने वाले थे। उनकी मौत कैसे हुई यह आज भी रहस्य बना हुआ है। अब डॉ. शशांक श्रीवास्तव का शव इसी आवास में मिलने से खलबली मच गई। सीएमओ डॉ. स्वदेश गुप्ता ने बताया कि घटना की विभागीय जांच भी कराई जाएगी।



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