वोट चोरी के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और भाजपा में जंग तेज हो गई है। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने सपा पर वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में वोटर लिस्ट में धांधली का आरोप लगाते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी से जांच की मांग की है। उन्हाेंने पूर्व ब्लाॅक प्रमुख नवाब सिंह यादव और उनके भाइयों के दो-दो जगह वोट होने का आरोप लगाकर सपा को चुनाव आयोग से माफी मांगने के लिए कहा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए लिखा कि-अब ये हटे नहीं तो घट तो जाएंगे ही। कभी-कभी ज्यादा होशियारी भी भारी पड़ जाती है। ये तो गए।

कन्नौज सदर सीट से विधायक एवं समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने सोमवार को एक वीडियो संदेश जारी कर सनसनी फैला दी। उन्होंने कहा कि वह विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग का पूरा समर्थन करते हैं। वोटर लिस्ट की शुद्धता होना अति आवश्यक है। कन्नौज में एक-एक ने दो-दो, तीन-तीन जगह वोट बनवा रखे हैं, जिनके प्रमाण उनके पास हैं। उदाहरण के तौर पर कन्नौज सदर से पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव, जिसको सपा शासन में मिनी मुख्यमंत्री और अखिलेश यादव का दाहिना हाथ कहा जाता था। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में वह अखिलेश यादव व राहुल गांधी के साथ मंच पर मौजूद था। उसी चुनाव में उसका वोट पैतृक गांव अड़ंगापुर के बूथ संख्या 233 पर उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है तो शहर के बूथ संख्या 299 ग्वाल मैदान में भी वोटर लिस्ट में उसका नाम है।

इन बूथाें पर उसके भाई वीरपाल उर्फ नीलू यादव व कल्यान सिंह के नाम भी दर्ज हैं। यह वही नवाब सिंह है जो 12 अगस्त 2024 को किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में पकड़ा गया था और वर्तमान में जेल में बंद है। उन्होंने बताया कि वह साक्ष्य के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी से शिकायत करेंगे कि वह इस मामले में कार्रवाई करें। समाजवादी पार्टी भी माफी मांगे और चुनाव आयोग का पूर्ण समर्थन करे। कन्नौज से सांसद और सदर सीट से विधायक के बीच वोट चोरी के मुद्दे पर द्वंद्व युद्ध छिड़ा है, जिसकी सियासी गलियारों में काफी चर्चा हो रही है।

अब ये हटे नहीं तो घट तो जाएंगे ही: अखिलेश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने मंत्री असीम अरुण के आरोपों पर पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पर संदेश लिखा कि – देखना है कि अपनी ही सरकार के कार्यकाल में धांधली का आरोप लगाने वालों को दिल्ली वाले हटाते हैं या लखनऊ वाले या। दो इंजन के बीच में…वाली कहावत में इनका पत्ता साफ होगा। दिल्ली वालों को लग रहा है कि हमारे अधीन आने वाले आयोग पर किसी और के कहने पर उंगली उठाई जा रही है और लखनऊ वालों को लग रहा है कि हमारे प्रशासन पर किसी और के कहने पर आरोप लगाया जा रहा है। अब ये हटे नहीं तो घट तो जाएंगे ही। कभी-कभी ज्यादा होशियारी भारी पड़ जाती है।



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