बजट में करों में कटौती की उम्मीद कर रहे शेयर बाजार को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने कर घटाने के बजाय वायदा कारोबार पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ा दिया है। यह कदम खुदरा निवेशकों को ध्यान में रखकर उठाया गया है लेकिन शेयर दलाल (ब्रॉकर्स) और बाजार अवसंरचना (मार्केट इंफ्रा) वाली कंपनियों के लिए यह नकारात्मक है। एसटीटी में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी को शेयर बाजार ने हाथों-हाथ नहीं लिया और घोषणा के तुरंत बाद सेंसेक्स में 2000 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, दिन के कारोबार के अंत तक सेंसेक्स 1547 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 495 अंकों की कमी आई। इस चौतरफा गिरावट के कारण शहर के निवेशकों के पोर्टफोलियो में करीब 2,500 करोड़ रुपये की कमी आने का अनुमान है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार के वायदा कारोबार में 10 में से नौ खुदरा व्यापारियों को घाटा होता है। खुदरा निवेशकों को लंबी अवधि में धन सृजन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, वायदा कारोबार पर एसटीटी में 150 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। इसी तरह, विकल्प पर एसटीटी में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। वायदा कारोबार के लिए एसटीटी को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी और विकल्प कारोबार के लिए 0.10 फीसदी से बढ़ाकर 0.15 फीसदी कर दिया गया है। इस कदम को एल्गोरिथम और मशीन ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने की दिशा में एक प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।

दिसंबर महीने में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के कैश सेगमेंट में कानपुर की हिस्सेदारी 0.24 फीसदी थी। दिसंबर 2025 में एनएसई कैश सेगमेंट में कुल कारोबार 4,989 करोड़ रुपये का हुआ था जो दैनिक औसत कारोबार के लिहाज से लगभग 227 करोड़ रुपये प्रतिदिन है। इसके अतिरिक्त बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) कैश सेगमेंट में कानपुर की औसत हिस्सेदारी 0.067 फीसदी है। इससे पहले, जुलाई 2024 में पेश किए गए बजट में अल्पावधि पूंजीगत लाभ कर (शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स) को 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स) को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.50 फीसदी कर दिया गया था। साथ ही वायदा और विकल्प की बिक्री पर एसटीटी को 0.0625 फीसदी से बढ़ाकर 0.1 फीसदी और केवल वायदा की बिक्री पर एसटीटी को 0.0125 फीसदी से बढ़ाकर 0.02 फीसदी कर दिया गया था।

सोवरन गोल्ड बॉन्ड और शेयर बायबैक पर नए कर नियम

सोवरन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वालों के लिए एक चिंताजनक खबर है। एक अप्रैल 2026 के बाद द्वितीयक बाजार से खरीदे गए सोवरन गोल्ड बॉन्ड को बेचने पर कर लगेगा जबकि पहले यह कर-मुक्त था। इस बीच, नगर निगमों की ओर से म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करने और उसे स्टॉक एक्सचेंज में पंजीकृत कराने पर केंद्र सरकार 100 करोड़ रुपये तक का प्रोत्साहन प्रदान करेगी। कानपुर नगर निगम का म्युनिसिपल बॉन्ड भी प्रस्तावित है। एसएमई ग्रोथ फंड शहर सहित देश भर के लघु और मध्यम उद्यमों को आईपीओ लाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके अलावा, शेयर बायबैक (शेयर पुनर्खरीद) से प्राप्त राशि को अब लाभांश (डिविडेंड) के बजाय पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) माना जाएगा। इसका अर्थ है कि बायबैक से प्राप्त धन अब पूंजीगत लाभ कर के दायरे में आएगा। इस बदलाव से स्मॉल कैप शेयरों में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है।

बजट के बाद आरबीआई का क्रेडिट पाॅलिसी बाजार के लिए अहम होगा। अगर ब्याज दरों में कटौती होती है तो शेयर बाजार को सहारा मिल सकता है। लंबी अवधि के लिए भारतीय शेयर बाजार का फंडामेंटल मजबूत है। गिरावट पर अच्छे फंडामेंटल्स और ग्रोथ पोटेंशियल वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहिए। – राजीव सिंह, को- फाउंडर, केश्री ब्रोकिंग

सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग दोनों पर एसटीटी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का असर उन निवेशकों पर पड़ेगा जो डेरिवेटिव्स बाजार के प्रमुख खिलाड़ी हैं। फ्यूचर्स पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया गया है। जिससे अनुमानित कलेक्शन लगभग 2,000 करोड़ से बढ़कर 5,000 करोड़ हो जाएगा। इस घोषणा के बाद निवेशकों की चिंताएं बढ़ी हैं। – किशोर वकील, चेयरमैन, रुद्रा शेयर्स एंड स्टाॅक ब्रोकर्स लिमिटेड

 



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