महीने भर पहले आसपास के जिलों में चोरों के समूहों की दस्तक का अलर्ट मिलने के बावजूद कमिश्नरी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। उसी का खामियाजा है कि अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में मचने वाला चोरों का शोर शहरी इलाकों में भी पहुंच गया है। गुजैनी, बर्रा, गोविंदनगर, हनुमंत विहार इलाकों में भी लोग रतजगा कर अपने घरों की सुरक्षा कर रहे हैं। इतना होने के बावजूद पुलिस अभी तक चोरों तक नहीं पहुंच पाई है।
करीब एक माह पूर्व खुफिया, एलआईयू ने इनपुट दिया था कि कानपुर के आसपास के जिलों में चोरों के समूह सक्रिय हैं। इस पर पुलिस कमिश्नर ने हाईवे और सीमा से सटे इलाकों के थानेदारों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए थे पर पुलिस सोती रही। इसी कारण 15 दिनों से चोरों की चहलकदमी और ड्रोन की असली वजह तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है। गांवों से लेकर शहर तक इस समय चोरों का खौफ इस कदर है कि क्षेत्र में रहने वाले नवयुवकों की टोलियां रात में हाथों में लाठी-डंडे, टार्च, सरिया लेकर जागते रहो कहते हुए लोगों को सचेत कर रहे हैं।
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चोरों की अफवाह पर सड़कों पर उतरे लोग
– फोटो : अमर उजाला
हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि लोगों ने अपने रिश्तेदारों को रात में न आने के लिए सचेत कर दिया है। आलम यह है कि अब रात में दूसरे क्षेत्रों में जाना भी खतरे से खाली नहीं है। अजनबियों को देखकर लोग उन्हें चोर समझकर हमला कर रहे हैं। कई घटनाएं सामने आई हैं जिसमें अजनबियों को पीट-पीटकर बेदम तक कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर लगातार चोरों की नकाबपोश में और मारपीट के बाद मरणासन्न पड़े होने पर फोटो व वीडियो वायरल हो रहे हैं।
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चोरों की अफवाह पर सड़कों पर उतरे लोग
– फोटो : अमर उजाला
हिरासत में लिए गए युवकों ने अपनी पहचान ज्यादातर बिहार, झारखंड समेत अन्य जनपदों की बताई है। पिछले कुछ दिनों से सबसे ज्यादा गुजैनी, बर्रा, गोविंदनगर, हनुमंत विहार, सेनपश्चिम पारा, बिधनू, चकेरी, कल्याणपुर, सचेंडी में लोग परेशान हैं।
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चोरों की अफवाह पर सड़कों पर उतरे लोग
– फोटो : अमर उजाला
वहीं ग्रामीण इलाकों में महाराजपुर, नरवल, चौबेपुर, शिवराजपुर, बिल्हौर की लाखों की आबादी रात में जागने पर मजबूर है। कई चोरियां भी हुईं लेकिन खुलासे शून्य हैं। चकेरी के दीपू सिंह, पवन सिंह, रोहित, अवधेश, राम जी, ओम, मयंक, रमेश सिंह, मालती, विमला, सुशीला व पंकज आदि ने बताया कि चोरों के कारण लोग डरे हुए हैं। रात में लाठी-डंडे, टॉर्च लेकर रात भर जगराता कर रहे हैं। लोग अब बारी-बारी से सो भी रहे हैं। रात्रि गश्त कहीं पर भी दिखाई नहीं दे रही है।
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चोरों की अफवाह पर सड़कों पर उतरे लोग
– फोटो : अमर उजाला
अफसरों की फौज, फिर भी खामियाजा उठा रहा शहर
कमिश्नरी चलाने के लिए दर्जन भर से ज्यादा आईपीएस अफसरों की फौज है। साथ ही दरोगाओं की भी अच्छी खासी संख्या है। हालांकि सिपाहियों की संख्या कम है। मुखबिर तंत्र पूरी तरह से फेल है। माना जाता है कि गश्त सिपाहियों की जिम्मेदारी है लेकिन इस तरह का माहौल होने पर भी आलाधिकारी आंख बंद किए बैठे हैं।है।
पुराने चोरों की खंगाल रहे कुंडली
गश्त बढ़ाने के निर्देेश दिए गए हैं। पुलिसकर्मियों की संख्या सीमित है। ऐसे में लोगों से अपील है कि किसी भी इस तरह की सूचना मिलने पर पुलिस को जानकारी दें। कानून व्यवस्था अपने हाथ में न लें। थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लोगों के संग बैठक कर उन्हें जागरूक करें। पुलिस चोरी की घटनाओं के खुलासे के लिए पुराने चोरों की कुंडली खंगाल रही है। – आशुतोष कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था)