Khatauli Pradhan protest ने ग्रामीण समस्याओं को लेकर Muzaffarnagar प्रशासन की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश के खतौली तहसील परिसर में अखिल भारतीय प्रधान संगठन द्वारा दिया जा रहा धरना समाप्त हो गया, लेकिन आंदोलन की गूंज अभी थमी नहीं है। धरने को बार संघ खतौली का समर्थन मिलने से आंदोलनकारियों का मनोबल और अधिक मजबूत हुआ और प्रशासन पर समाधान के लिए दबाव साफ तौर पर बढ़ता दिखाई दिया।
धरना समाप्त, लेकिन मुद्दे अब भी केंद्र में
अखिल भारतीय प्रधान संगठन के बैनर तले चल रहा यह धरना विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर आयोजित किया गया था। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से कई बुनियादी समस्याएं लंबित पड़ी हैं, जिनकी अनदेखी से ग्रामीण और किसान लगातार परेशान हैं। धरने के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के बाद कुछ मामलों का मौके पर ही निस्तारण कराया गया, जिससे आंदोलनकारियों को आंशिक राहत मिली।
हालांकि, कई गंभीर समस्याएं ऐसी रहीं जिनका समाधान तत्काल संभव नहीं हो सका। इन्हीं मुद्दों को लेकर सोमवार को तहसील प्रांगण में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत वार्ता तय की गई है।
जल निगम, एनएचएआई और राजस्व से जुड़े मुद्दे प्रमुख
Khatauli Pradhan protest के दौरान प्रधान संगठन ने स्पष्ट किया कि सबसे अधिक शिकायतें जल निगम, एनएचएआई और राजस्व विभाग से संबंधित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। कई गांवों में पाइपलाइन बिछने के बावजूद नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही, जिससे ग्रामीणों को निजी संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य सड़कों की स्थिति भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा रही। सड़क निर्माण में देरी, अधूरे कार्य और क्षतिग्रस्त मार्गों के कारण किसानों और ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
भूमि विवाद और मुआवजे ने बढ़ाई नाराजगी
राजस्व विभाग से जुड़े भूमि विवाद, सीमांकन और मुआवजा भुगतान के प्रकरण भी धरने में प्रमुखता से उठाए गए। कई किसानों का आरोप है कि सड़क परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों में उनकी भूमि अधिग्रहित तो की गई, लेकिन मुआवजा समय पर नहीं मिला। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ा है।
प्रधान संगठन के नेताओं ने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद इन मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
सोमवार की वार्ता पर टिकी निगाहें
धरना समाप्त होने के साथ ही सभी की निगाहें अब सोमवार को होने वाली वार्ता पर टिकी हैं। इस बैठक में जल निगम, एनएचएआई और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहेंगे। संगठन का कहना है कि इस वार्ता में हर समस्या को बिंदुवार रखा जाएगा और समाधान की स्पष्ट समय-सीमा तय कराई जाएगी।
Khatauli Pradhan protest से जुड़े पदाधिकारियों ने साफ किया कि यदि वार्ता के बाद भी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ, तो आगे की आंदोलनात्मक रणनीति पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
धरने में बड़ी संख्या में प्रधान और किसान शामिल
धरने के दौरान अखिल भारतीय प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक राठी, ब्लॉक अध्यक्ष ओमवीर सिंह, किसान नेता सचिन चौधरी, प्रवेज प्रधान, ओमपाल प्रधान, दीपक प्रधान, लियाकत प्रधान, तैययब प्रधान, रोशन लाल, रमेश प्रधान, राकेश प्रधान सहित बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान और किसान मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में ग्रामीण समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
बार संघ खतौली के समर्थन से आंदोलन को कानूनी और सामाजिक बल भी मिला, जिससे प्रशासन पर संवाद के लिए दबाव और बढ़ गया।
ग्रामीणों की उम्मीद और प्रशासन से अपेक्षा
प्रधान संगठन ने प्रशासन से अपील की है कि किसानों और ग्रामीणों से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध समाधान किया जाए। संगठन का कहना है कि यदि समस्याओं का समाधान समय पर हो जाए, तो ग्रामीणों को बार-बार धरना और आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाना पड़ेगा।
Khatauli Pradhan protest ने यह साफ कर दिया है कि ग्रामीण मुद्दों पर एकजुटता और संगठित प्रयास प्रशासन को संवाद की मेज तक लाने में सक्षम हैं।
खतौली तहसील में प्रधान संगठन का यह धरना भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इससे उठी आवाज़ अब निर्णायक मोड़ पर है। सोमवार की वार्ता यह तय करेगी कि ग्रामीणों और किसानों की समस्याएं समाधान की दिशा में बढ़ेंगी या आंदोलन को नया रूप मिलेगा।
