अनधिकृत किडनी ट्रांसप्लांट की रोगी पारुल तोमर की प्रत्यारोपित किडनी इलाज के बाद अब धीरे-धीरे काम करने लगी है। पारुल किस्मत की धनी निकली क्योंकि ऑपरेशन के पहले और बाद में डॉक्टरों ने उसे मौत तक पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।

डॉक्टरों ने गैर कानूनी तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट तो किया ही सारे मानकों और चिकित्सा नैतिकता की भी हत्या कर दी। ट्रांसप्लांट के पहले डोनर और रोगी दोनों की इम्युनोलॉजिकल जांचें नहीं कराई गई। ट्रांसप्लांट के पहले सबसे जरूरी एचएलए एंटीजन की भी जांच नहीं हुई। 




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Kidney Racket Parul Health Improves Following treatment Hospital her kidneys gradually began to filter again

मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पारुल की जांच करते मैडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


इसी जांच से तय होता कि प्रत्यारोपित किडनी नए शरीर में कितना काम करेगी या शरीर उसे रिजेक्ट कर देगा। चार घंटे तक किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद तुरंत सामान्य में डालने जैसा है। इससे जानलेवा संक्रमण का खतरा रहता है। 

 


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हैलट में किडनी डोनर आयुष चौधरी की जांच करते प्राचार्य डॉ. काला और अन्य
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


तीमारदार को इलाज से संबंधित कोई पर्चा नहीं दिया गया। उसके बाद की जांचें भी नहीं कराई गई। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि किडनी, लिवर, बोन मैरो ट्रांसप्लांट के पहले एचएलए एंटीजन की जांच जरूरी होती है। इसी से मैचिंग की जाती है और रिजेक्शन का पता चलता है।

 


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किडनी कांड के मरीज पारुल और आयुष चौधरी को देखते डॉक्टर
– फोटो : amar ujala


जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि किडनी के फिल्टर करने से सीरम क्रेटेनिन कम हुआ है। हालांकि, वह अभी रोगी को रेफर करने के लिए बात कर रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट न होने से रोगी के इलाज की सुविधाएं नहीं हैं। वह अपने स्तर से व्यवस्था करा रहे हैं। 

 


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आहूजा हॉस्पिटल और डॉ. प्रीति आहूजा
– फोटो : amar ujala


हैलट में रोगी का अनधिकृत रूप से इलाज किया जा रहा है। अभी मल्टी सुपर स्पेशियलटी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए अनुमति नहीं मिली है।

डॉ. काला ने बताया कि ट्रांसप्लांट के रोगी को केटीयू में रखकर इलाज किया जाना जरूरी है। 

 




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