मैनपुरी। मनरेगा श्रमिकों को रोजगार देने और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए शुरू की गई थी। जिले में योजना की राह ही अलग है। एक सप्ताह पूर्व हुए भुगतान में किशनी ब्लॉक ने करोड़ों का भुगतान कर लिया, जबकि दूसरे ब्लॉक लाखों तक सिमट गए। दूसरे ब्लॉकों का हक छिनने के बाद भी जिम्मेदार चैन की नींद सो रहे हैं।
30 और 31 अगस्त को शासन ने मनरेगा सामग्री मद में भुगतान के लिए लगभग 19 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई थी। इस धनराशि से सभी नौ विकास खंडों में कराए गए कार्यों का भुगतान किया जाना था। किशनी विकास खंड ने इस धननराशि से लगभग एक तिहाई अकेले ही भुगतान कर दी। दो दिनों में कुल 5.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि बाकी आठ ब्लॉक पिछड़ गए। यहां तक कि कोई भी विकास खंड किशनी के सापेक्ष आधा भुगतान भी नहीं कर सका। जागीर विकास खंड में न्यूनतम 84.51 लाख रुपये का भुगतान किया गया जो किशनी के मुकाबले छठवें भाग से भी कम है। ऐसा ही हाल घिरोर और सुल्तानगंज का भी रहा। यहां भी भुगतान पिछड़ गया।
इस पूरे मामले में किशनी ने दूसरे विकास खंडों के मुकाबले अधिक भुगतान कर वहां विकास कार्यों की गति को धीमा कर दिया। लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी कोई परवाह नहीं है। सभी जिम्मेदार चैन की नींद सो रहे हैं। संवाद
आखिर कैसे कर लिया इतना भुगतान
किशनी विकास खंड में हुए 5.72 करोड़ के इतने बड़े भुगतान को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। जानकार बताते हैं कि किशनी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 दोनों में ही भुगतान किया है। इसके लिए लॉगिन को लॉगाउट भी करना पड़ता है। इसके बाद भी केवल 30 मिनट में किशनी ने इतना बड़ा भुगतान कर दिया, जबकि अन्य विकास खंड ऐसा नहीं कर पाए। सूत्रों के अनुसार इसके लिए तकनीकी का प्रयोग कर ऐसा किए जाने की बात भी लोग कह रहे हैं, लेकिन खुलकर बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। दरअसल उन्हें पता है कि अगर तकनीकी के सहारे ये भुगतान किया गया है तो जिम्मेदारों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।
विकास खंडवार हुआ भुगतान
विकास खंड का नाम भुगतान
-किशनी 5.72 करोड़
-बेवर 2.63 करोड़
-मैनपुरी 2.56 करोड़
-कुरावली 2.05 करोड़
-करहल 1.47 करोड़
-सुल्तानगंज 1.44 करोड़
-घिरोर 1.40 करोड़
-बरनाहल 98.43 लाख
-जागीर 84.51 लाख
मनरेगा भुगतान के संबंध में जानकारी की जाएगी। अगर कहीं कोई गड़बड़ी है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। – अविनाश कृष्ण सिंह, डीएम
