करहल(मैनपुरी)। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आने वाले धनराशि का फर्जीवाड़ा रुक नहीं रहा है। सख्त कार्रवाई न होने से फर्जीवाड़ा करने वाले प्रधान और सचिवों के हौसले बुलंद है। अब करहल की ग्राम पंचायत तखरऊ में मजदूरों के हक का पैसा ग्राम प्रधान के देवर ने अपने खाते में भुगतान कर लिया। शिकायत के बाद जांच में मामला खुल भी गया, लेकिन अब तक कार्रवाई का इंतजार है।
तखरऊ निवासी सचिन तिवारी ने ऑनलाइन शिकायत की थी। इसमें बताया था कि ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया। इसमें मिट्टी भराव कार्य, पंचायत घर की चहारदीवारी निर्माण, पुलिस निर्माण, पंचायत भवन का रंग रोगन, सीसी कार्य आदि शामिल थे। इसकी जांच सहायक विकास अधिकारी पंचायत करहल को सौंपी गई थी। जांच में उन्होंने पाया कि ये कार्य तो मौके पर किए गए हैं, लेकिन श्रमिकों के भुगतान में फर्जीवाड़ा हुआ है।
जो धनराशि श्रमिकों के खातों में जानी चाहिए वह प्रधान ने अपने देवर के खाते में डाल दी, यह नियम विरुद्ध है। सहायक विकास अधिकारी ने आख्या में इसे नियम विरुद्ध बताते हुए कार्रवाई की बात लिखी थी। अब तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। शिकायतकर्ता सचिन का आरोप है कि अधिकारी जांच रिपोर्ट में दोषी मिलने के बाद भी प्रधान और सचिव को बचा रहे हैं।
परिवार या संबंधी के खाते में नहीं हो सकता भुगतान
ग्राम पंचायत निधि, मनरेगा या अन्य किसी निधि की धनराशि का भुगतान ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक या पंचायत सहायक के स्वयं के खाते में या परिवार के खाते में नहीं किया जा सकता। यहां तक कि किसी सगे संबंधी के खाते में भी भुगतान नहीं किया जा सकता है। अगर ऐसा किया जाता है तो कार्रवाई होना तय है।
डीपीआरओ बोले दोबारा होगी जांच
मामले में जब डीपीआरओ यतेंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने दोबारा जांच कराने की बात कही। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्राप्त शिकायत पर जांच कराई गई थी। इसमें सहायक विकास अधिकारी पंचायत ने रिपोर्ट लगाई थी कि कार्यों के परिश्रमिक का भुगतान प्रधान के देवर के खाते में किया गया है। डीएम के आदेश पर इस प्रकरण की दोबारा जांच कराई जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
