अमर उजाला ब्यूरो

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झांसी। नगर निगम में करोड़ों रुपये कीमत की नजूल जमीन घोटाले का मामला उजागर हुआ है। नगर निगम के संपत्ति विभाग से जुड़े कर्मचारियों की मिलीभगत से मिनर्वा चौराहे के आसपास की करीब 3.687 हेक्टेयर नजूल जमीन का बैनामा कर दिया गया। पिछले माह शिकायत मिलने पर जांच कराई गई। जांच में शिकायत सही पाई गई। इस मामले में अब पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही संपत्ति विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है।

गोविंद चौराहे से मिनर्वा जाने वाली सड़क के दोनों ओर की जमीन रक्षा मंत्रालय ने 10 नवंबर 1957 को नगर पालिका के सुपुर्द की थी। इसके बाद यह जमीन नगर निगम के हाथ आ गई। नजूल रजिस्टर में यह जमीन खाता संख्या 111 पर गाटा संख्या 4058 एवं 3.687 हेक्टेयर रकबा के तौर पर दर्ज है। मौजूदा समय में इसकी बाजार में कीमत कई करोड़ रुपये है। एक अरसे से जमीन कारोबारियों की निगाह इस बेशकीमती जमीन पर थी। पिछले साल निगम के संपत्ति विभाग में तैनात कर्मचारियों से मिलीभगत करके उन्होंने नजूल जमीन का बैनामा कर दिया। कई मामले सामने आए, जिसमें इस जमीन को अपना बताते हुए उस पर कब्जा भी दिला दिया गया। पिछले माह शिकायतकर्ता के पहुंचने पर निगम अफसरों की नींद टूटी। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच कराने में इस पूरी नजूल जमीन में कई फर्जी तरीके से कराए गए बैनामे सामने आए। अब इन बैनामों की भी जांच कराई जा रही है। वहीं, नगर निगम फर्जीवाड़ा करने के पांच आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी में है। इसके साथ ही संपत्ति विभाग में तैनात कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। नगर आयुक्त सत्यप्रकाश के मुताबिक फर्जीवाड़ा के आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल

महानगर की अरबों रुपये की जमीन की देखदेख संपत्ति विभाग के जिम्मे है लेकिन, हैरत की बात यह कि इतना संवेदनशील विभाग आउटसोर्स कर्मचारियों के ही भरोसे है। इस समय यहां तैनात राजस्व निरीक्षक, लेखपाल से लेकर ऑपरेटर पद पर आउटसोर्स कर्मचारी ही संभाल रहे हैं। जिस समय यह घोटाला सामने आया उस समय राजस्व निरीक्षक, एडीएम, ऑपरेटर एवं मानचित्राकार की भूमिका खंगाली जा रही है।



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