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उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 14 जिलों में फैले बुंदेलखंड को अलग राज्य घोषित करने की मांग कई दशकों से की जा रही है। प्रमुख राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन तो किया, लेकिन इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनाया। जबकि, आजादी के बाद लगभग आठ साल तक बुंदेलखंड अलग राज्य रहा, बाद में इसके जिलों को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में शामिल कर दिया गया। इसके बाद यह अपना पुराना स्वरूप वापस नहीं पा सका।
35 छोटी-बड़ी रियासतों को शामिल कर 12 मार्च 1948 को अलग बुंदेलखंड राज्य बनाया गया था। इसकी राजधानी नौगांव थी। पर, अलग राज्य का यह सफर लंबा नहीं चल पाया। एक नवंबर 1956 को सातवां संविधान संशोधन लागू होने के बाद मध्य प्रदेश अलग राज्य बना और बुंदेलखंड के बड़े हिस्से को उसमें शामिल कर दिया गया, जबकि बाकी हिस्से का उत्तर प्रदेश में विलय हो गया।
हालांकि, तब इसे लेकर खूब आंदोलन हुए और यह सिलसिला अब भी जारी है। चुनावों के दरम्यान समय-समय पर स्थानीय प्रत्याशियों ने इसे अपने निजी एजेंडे में तो जरूर शामिल किया, लेकिन भाजपा, कांग्रेस, सपा व बसपा जैसे दलों के घोषणा पत्रों में यह अपनी जगह कभी नहीं बना पाया।
