
Lok Sabha Election 2024
– फोटो : अमर उजाला
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कहीं इसका जोर, कहीं उसका जोर। बस शोर ही शोर। चुनावी बयार क्या चली, गलियां सियासी हो गईं। घर-आंगन सियासी हो गए। चौबारे सियासी हो गए। कहीं लकीरें खिंच रही हैं, तो कहीं लकीरें मिट रही हैं। यहां जज्बात बंट रहे हैं। खेमों में। धड़ों में…। सियासी प्रयोगशालाएं दिन-रात जुटी हैं। खामोशी से। पूरी तन्मयता से। प्रयोग जारी है। इस चुनाव में कैराना की जनता क्या सोच रही है, कौन से चुनावी मुद्दे हैं और आमजन के मन में क्या है, पेश है इसकी थाह लेती एक रिपोर्ट…
पलायन जैसे मुद्दे पर सुर्खियां बटोरने वाला कैराना फिर चुनावी दंगल में है। योद्धा मैदान में आ चुके हैं। अखाड़े में दंड-बैठक जारी है। कैराना यूं ही नहीं अहम है। यहां से चली सियासी बयार दूर तलक जाती है। यही वजह है कि सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। योद्धा अपने तरकश के तीरों को पैना बनाने में जुटे हैं।
शाम के चार बजे हैं। हम आम जनता का मिजाज लेने के लिए निकले तो भारतीय किसान यूनियन के बड़े आंदोलन का गवाह बना गांव खेड़ी करमू गुलजार मिला। यहां लोगों में चुनावी चर्चा चल रही थी। चीनी मिलों से लौटे किसान भी चुनावी चर्चा में मशगूल दिखे। हम भी उनमें शामिल हो गए। एक कोने से आवाज आती है, कैराना के बारे में चाहे कुछ भी कहा जाए, पर यहां भाईचारा लाजवाब है।
मुकाबला इस बार भी सीधा भाजपा और सपा में नजर आ रहा है। हालांकि, बसपा भी चुनावी मैदान में ताल ठोक रही है, पर असली लड़ाई तो अलग ही है। बीच में ही रवि कुमार कहते हैं, कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे को कैसे भूल जाएं। एक दौर था जब शाम पांच बजे के बाद खेतों में नहीं जा सकते थे। आज जब भी मन करे, खेत में जा सकते हैं। कृषि यंत्र भी खेत में सुरक्षित पड़े रहते हैं।
