
फाइल फोटो
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुलायम सिंह यादव सरकार को समर्थन देने की कीमत कांग्रेस को चुकानी पड़ी। इस फैसले ने ज्यादातर हिंदुओं के बीच कांग्रेस को अलोकप्रिय बना दिया। कांग्रेस शायद सोच रही थी कि अपने 94 विधायकों के समर्थन की ताकत पर वह मुलायम को नचाएगी।
साथ ही किसी उपयुक्त मौके पर मुद्दा ढूंढकर उनसे समर्थन वापस लेकर अपनी राजनीति करेगी। पर, ऐसा हो नहीं पाया। मुलायम काफी तेज निकले। कांग्रेस में समर्थन वापस लेने की योजना ही बनती रही, उधर मुलायम ने एक दिन तड़के राजभवन पहुंचकर त्यागपत्र दे उसकी योजना को ध्वस्त कर दिया। साथ ही कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने का रास्ता भी तलाश लिया।
कांग्रेस को कुछ नहीं मिला। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अंबिका प्रसाद तिवारी कहते हैं कि कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व को शायद लगा था कि वह धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मुलायम को समर्थन देकर मुस्लिमों के बीच खोया जनाधार वापस पा लेंगे।
पर, वह भूल गए थे कि उनका पाला मुलायम जैसे शातिर सियासी खिलाड़ी से पड़ा है। यह भी भूल गए कि मुलायम ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाकर मुस्लिम समुदाय और भाजपा विरोधी खेमे में काफी गहरी पैठ बना ली है।
