
अखिलेश यादव
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
समाजवादी पार्टी ने 30 जनवरी को जारी अपनी पहली सूची में बदायूं से धर्मेंद्र यादव को टिकट दिया था। पर, 20 फरवरी को धर्मेंद्र के स्थान पर शिवपाल यादव को मैदान में उतार दिया। शिवपाल यादव शुरुआत से ही यह चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं बताए जाते हैं। इसलिए टिकट घोषणा के एक पखवाड़े से ज्यादा समय तक वे चुनाव क्षेत्र में ही नहीं गए। अब उनके बेटे आदित्य यादव को टिकट देने का स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से प्रस्ताव आया है। इस प्रस्ताव के पीछे कौन है, किसी से छिपा नहीं है।
मुरादाबाद में पहले तो टिकट देने में काफी देरी की गई। 24 मार्च को सांसद डॉ. एसटी हसन को मैदान में उतारा गया और उन्होंने अपना पर्चा भी दाखिल कर दिया। सपा नेतृत्व की अनिर्णय की स्थिति ही है कि नामांकन के अंतिम दिन प्रत्याशी बदला गया और डॉ. एसटी हसन के बजाय रुचि वीरा को सिंबल मिला। बताते हैं कि यह परिवर्तन आजम खां के कारण किया गया। इस फैसले का जहां मुरादाबाद में डॉ. एसटी हसन के समर्थकों ने विरोध किया, वहीं नाराज हसन ने भी कहा कि वे मुरादाबाद में पार्टी के लिए प्रचार नहीं करेंगे।
- इस स्थिति पर सपा के राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने भी तंज कसा-ब्रिटिश काल में भी मुरादाबाद कभी भी रामपुर के अधीन नहीं रहा, पर अब है।
टिकट वितरण में सबसे ज्यादा संशय गौतमबुद्धनगर, मेरठ और मिश्रिख में दिखा
- गौतमबुद्धनगर में पहले डॉ. महेंद्र नागर को प्रत्याशी घोषित किया गया। चार दिन बाद ही इस सीट पर राहुल अवाना को उतारा गया। बाद में पुनः डॉ. महेंद्र नागर को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। सपा के ही एक प्रमुख नेता नाम नहीं प्रकाशित करने के अनुरोध के साथ कहते हैं कि यह स्थिति बताती है कि टिकट वितरण से पहले ठीक से होमवर्क नहीं हुआ। इसी तरह से मिश्रिख में पहले रामपाल राजवंशी, फिर उनके बेटे मनोज कुमार राजवंशी और उनके बाद उनकी बहू संगीता राजवंशी को प्रत्याशी बनाया गया।
- सपा ने मेरठ में 15 मार्च को भानु प्रताप सिंह को उम्मीदवार घोषित किया। इसके साथ ही उनका टिकट बदले जाने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में शुरू हो गई। 1 अप्रैल को यहां से विधायक अतुल प्रधान को मैदान में उतारने की घोषणा की गई, लेकिन दूसरे चरण के नामांकन के अंतिम दिन 4 अप्रैल को पूर्व मेयर सुनीता वर्मा को सिंबल दे दिया। अतुल प्रधान ने पहले तो इस्तीफा देने की धमकी दी, हालांकि बाद में कहा कि जो राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का निर्णय है, हमें स्वीकार है। उन्होंने सोच-समझकर ही निर्णय लिया होगा।
- यही स्थिति बागपत में भी आई, जहां 20 मार्च को सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी को उतारा गया। नामांकन के अंतिम दिन टिकट बदलकर पूर्व विधायक अमर पाल शर्मा को दिया गया। वहीं, बिजनौर में भी पूर्व सांसद यशवीर सिंह का टिकट काटकर दीपक सैनी को दिया गया। सपा के ही एक नेता कहते हैं कि टिकट बदले जाने से अधिकृत प्रत्याशी का पार्टी के भीतर ही कार्यकर्ताओं व नेताओं का एक धड़ा विरोध करने लगता है। भितरघात से बचने के लिए जरूरी है कि पूरा होमवर्क करने के बाद प्रत्याशी बनाया जाए।
