
सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
उत्तर प्रदेश में सात चरणों में लोकसभा चुनाव होंगे। इस चुनाव में मतदाताओं को पोलिंग बूथ पर लाने की राह में सबसे बड़ी चुनौती होगी भीषण गर्मी। पिछले दो लोकसभा चुनाव की तुलना में ये चुनाव देर तक चलेंगे। जहां वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव क्रमश: 19 मई और 12 मई तक चले थे। वहीं इस बार यूपी में सातवें चरण की आखिरी वोटिंग एक जून को होगी।
प्रदेश में लोकतंत्र का महा उत्सव 19 अप्रैल से शुरू होगा, जो एक जून तक चलेगा। पिछले दस साल के चुनाव को देखें तो इस बार चुनावी सहालग सबसे लंबी चलेगी। एक तरफ राजनीतिक दलों का मुकाबला प्रतिस्पर्धी से होगा तो दूसरी तरफ भीषण गर्मी भी बड़ी चुनौती साबित होगी। पछुआ हवाएं मतदाताओं को रोकने का भरसक प्रयास करेंगी। राजनीतिक दलों को ग्रामीण इलाकों से ज्यादा इस समस्या से शहरों में ज्यादा जूझना पड़ेगा।
इस बार सबसे लंबा चुनावी सीजन
पिछले दो लोकसभा चुनावों की तुलना में इस बार यूपी में चुनावी सीजन सबसे लंबा होगा। वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में आचार संहिता के एलान से लेकर अंतिम चरण का मतदान कुल 67 दिन में निपट गया था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव भी यूपी में 69 दिन में संपन्न हुए। वहीं वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव यूपी में 78 दिन तक चलेंगे। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार मई में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। ऐसे में राजनीतिक दलों के सामने केवल मतदाता ही नहीं बल्कि अपने कार्यकर्ताओं को भी मैदान में जमे रहने के लिए खासी मशक्कत करना पड़ेगी।
उत्तर प्रदेश में लोकसभा-2024 चुनाव
सात चरणों में चुनाव – 19 अप्रैल, 26 अप्रैल, 7 मई, 13 मई, 20 मई, 25 मई और एक जून।
आचार संहिता लगी -16 मार्च, परिणाम आएंगे – 4 जून को।
कुल चुनावी दिन -78
उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2019
सात चरणों में चुनाव- 11 अप्रैल, 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, 29 अप्रैल, 6 मई, 12 मई और 19 मई
आचार संहिता लगी – 11 मार्च
कुल चुनावी दिन – 69 दिन
परिणाम आया – 23 मई को
उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2014
छह चरणों में चुनाव – 10, 17, 24, 30 अप्रैल और 7, 12 मई
आचार संहिता लगी – 6 मार्च
कुल चुनावी दिन – 67 दिन
परिणाम आए – 16 मई को
पिछले लोकसभा चुनाव भी यही कह रहे
मतदान और मतदाता का मौसम से सीधा संबंध है। वर्ष 2014 में प्रदेश में लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई के बीच हुए थे। वर्ष 2019 में 7 अप्रैल से 12 मई के बीच लोकसभा चुनाव हुए। पिछले दोनों चुनाव कार्यक्रम में केवल सात दिन का अंतर था। लेकिन वर्ष 2019 के चुनाव में करीब एक फीसदी वोट ज्यादा पड़े। इसमें मौसम की भी अहम भूमिका थी। प्रचंड गर्मी के प्रहार से पहले ही 12 मई को चुनाव संपन्न हो चुके थे।
विधानसभा चुनाव : अच्छी वोटिंग में मौसम का भी रोल
प्रदेश में विधानसभा चुनाव गुलाबी मौसम में हुए। जिसका असर भी साफ दिखाई दिया। पिछले विधानसभा चुनाव 2022 में हुए थे। कोरोना और ओमिक्रोन के खतरे के बीच 403 विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी से 7 मार्च तक सात चरणों में मतदान हुआ। 10 मार्च को नतीजे भी आ गए थे। हल्की ठंड वाले इस सीजन में विधानसभा चुनाव में करीब 59.65 फीसदी मतदान हुआ था। यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव 11 फरवरी से 8 मार्च तक 7 चरणों में पूरे हुए थे। वसंत ऋतु में पूरा चुनाव निपटा। खुशनुमा माहौल का असर वोटिंग पर भी दिखा और करीब 61.11 % मतदाता पोलिंग बूथ तक पहुंचे थे।
लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में पिछले मतदान प्रतिशत
वर्ष 2014- 58.44 (राष्ट्रीय 66.44 फीसदी) (चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई 2019)
वर्ष 2019 – 59.21 (राष्ट्रीय 67.40 फीसदी) (चुनाव 7 अप्रैल से 12 मई 2014)
