Loksabha Election 2024: Outsider candidates always won on Devpatan Mandal seat.

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

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मतदाताओं का मन, मूड और माहौल भांपने वाले ही नेतागिरी की पाठशाला के मेधावी होते हैं। नेता से राजनेता तक का सफर तय कर विधानसभा और फिर संसद में भी जोरदार दस्तक देते हैं। ऐसे नेताओं का न कोई निश्चित दायरा होता है और न ही कोई विशेष क्षेत्र। वे जहां से भी उतरें जीत का समीकरण बना ही लेते हैं, लेकिन देवीपाटन मंडल का चुनावी अध्याय इससे जुदा है। यहां बाहरियों ने ही जीत का डंका बजाया है।

पहले आम चुनाव में मंडल की बलरामपुर, गोंडा के साथ ही बहराइच व कैसरगंज संसदीय क्षेत्र से बाहरी नेताओं ने राजनीतिक सफर शुरू किया। यह सिलसिला आगे भी जारी रहा। 1952 में गोंडा लोकसभा सीट पर केरल के अलप्पी निवासी और कभी यहां के जिलाधिकारी रहे केके नायर की पत्नी हिंदू महासभा की उम्मीदवार शकुंतला नायर, बलरामपुर सीट पर लखनऊ के बैरिस्टर व कांग्रेस प्रत्याशी हैदर हुसैन, तरबगंज विधानसभा क्षेत्र को मिलाकर बनी बाराबंकी सीट पर गैर जनपद निवासी कांग्रेस के ही हिदायतुल्ला अंसारी ने जीत हासिल की थी। 1957 में हुए दूसरे आम चुनाव में भी कहानी कुछ ऐसी ही रही। प्रतापगढ़ के कालाकांकर रियासत के राजा दिनेश प्रताप सिंह ने गोंडा, जनसंघ के अटल बिहारी वाजपेयी ने बलरामपुर से जीत दर्ज की।

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सभी ने किया प्रयोग

– 1971 में गोंडा से मनकापुर निवासी कांग्रेस के राजा आनंद सिंह और बलरामपुर से चंद्रभाल मणि त्रिपाठी को जीत मिली। लेकिन पहाड़ापुर से शकुंतला नायर और करनैलगंज बाराबंकी सीट से अमेठी जामो रियासत के रुद्र प्रताप सिंह जीते।

– 1977 में गोंडा सीट पर जौनपुर निवासी जनता पार्टी के सत्यदेव सिंह व बलरामपुर क्षेत्र से महाराष्ट्र निवासी नानाजी देशमुख विजयी हुए। 1991 व 1993 में भी सत्यदेव सिंह जीते।



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