Loksabha Election 2024: Pattern of Voters of Sitapur.

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सांसद चुनने में सीतापुर के मतदाताओं का अंदाज कुछ अलग है। जो मन को भाया उसे पलकों पर बैठाया, जो पसंद नहीं आया, उसकी जमानत तक जब्त करा दी। जी हां, अब तक के लोकसभा चुनाव में 194 में से 155 प्रत्याशी अपनी जमानत जब्त करा चुके हैं। इनमें प्रमुख सियासी दलों के दिग्गज भी शामिल हैं। सीतापुर लोकसभा क्षेत्र का पहला आम चुनाव 1951 में हुआ था। उस समय एक सीट पर दो सांसद चुने का प्रावधान था। लिहाजा, पहले चुनाव में कांग्रेस के परागी लाल और उमा नेहरू सांसद निर्वाचित हुए थे।

1957 के चुनाव में भी दो सांसद चुने जाने की व्यवस्था लागू थी। संसद पहुंचने की हसरत लेकर 6 उम्मीदवारों ने चुनावी दंगल में किस्मत आजमाई थी। कांग्रेस के परागी लाल तथा उमा नेहरू ने जीत दर्ज की। तीन प्रत्याशी अपनी जमानत गंवा बैठे थे। 1962 के चुनाव में पांच प्रत्याशियों में से कांग्रेस के दिनेश प्रताप सिंह 34.03 फीसदी मत पाकर रनर रहे थे। इस चुनाव में तीन उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 1967 के चुनाव में 7 प्रत्याशी मैदान में थे। कांग्रेस के जगदीश चंद्र दीक्षित 29.42 फीसदी मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि पांच उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए थे।

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1971 में 10 प्रत्याशी चुनावी दंगल में उतरे थे। भारतीय जनसंघ के जयनारायण 33.92 फीसदी मत हासिल कर रनर रहे थे। जबकि आठ उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 1977 के चुनाव में पांच प्रत्याशियों में से कांग्रेस के जगदीश चंद्र 27.24 फीसदी मत पाकर दूसरे नंबर पर रहे और तीन उम्मीदवारों ने अपनी जमानत गंवा दी। 1980 के चुनाव में 11 प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें से दूसरे व तीसरे नंबर पर रहने वाले प्रत्याशी को छोड़कर अन्य उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए थे।

1984 का चुनावी दंगल 11 प्रत्याशियों के बीच हुआ था। इसमें 25.08 फीसदी मत हासिल कर दूसरे नंबर पर रहने वाले एलकेडी के हरगोविंद को छोड़कर अन्य उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 1989 का चुनाव 6 धुरंधरों के बीच लड़ा गया, इनमें दूसरे व तीसरे नंबर के प्रत्याशी को छोड़कर तीन योद्धा जमानत नहीं बचा सके थे। 1991 के चुनाव में 17 प्रत्याशियों में से रनर रही कांग्रेस की राजेंद्र कुमारी बाजपेई ही 22.85 फीसदी मत पाकर जमानत बचा पाई थी, जबकि 15 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। 1996 में 33 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। रनर भाजपा व तीसरे नंबर पर रहे बसपा के उम्मीदवारों को छोड़कर अन्य सभी ने अपनी जमानत गंवा दी थी।

1998 में नौ उम्मीदवारों के बीच चुनाव हुआ था। रनर बसपा व तीसरे नंबर पर रहे सपा प्रत्याशियों के अलावा बाकी 6 उम्मीदवार जमानत नहीं बचा सके थे। 1999 में 14 प्रत्याशी चुनाव लड़े थे, भाजपा व सपा प्रत्याशियों को छोड़कर सबकी जमानत जब्त हो गई थी। 2004 में 16 प्रत्याशियों में से दो को छोड़कर शेष प्रत्याशी जमानत गांव बैठे थे। 2009 और 2014 के चुनाव में 16-16 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। 2009 में 31.42 फीसदी मत पाकर रनर रहे सपा के महेंद्र वर्मा तथा 2014 में 35.69 फीसदी मत हासिल कर रनर रहने वाली बसपा की कैसर जहां को छोड़कर अन्य प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाए थे। 2019 के चुनावी दंगल में 12 धुरंधरों ने ताल ठोंकी थी। रनर रहे बसपा-सपा गठबंधन के प्रत्याशी नकुल दुबे ही 38.86 फीसदी मत पाकर जमानत बचा सके थे।

सबसे ज्यादा 1996 में 30 प्रत्याशियों ने गंवाई जमानत

सीतापुर लोकसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 30 प्रत्याशियों ने अपनी जमानत 1996 के चुनाव में गंवाई थी। इस चुनाव में कुल 33 उम्मीदवार चुनाव लड़े थे। सपा के मुख्तार अनीस 30.42 फीसदी मत पाकर विजई रहे थे। भाजपा के जनार्दन मिश्रा 28.36 फीसदी मत हासिल कर दूसरे तथा बसपा के प्रेमनाथ 24.17 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा अन्य सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।

यह दिग्गज भी गंवा बैठे थे जमानत

कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व एमएलसी पंडित रामगोपाल मिश्रा 1996 में कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़े थे। यह महज 10 फीसदी मत पाकर चौथे नंबर पर रहे थे। 1998 में कांग्रेस के दिग्गज नेता उत्तर प्रदेश के पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर अम्मार रिजवी 10.17 फीसदी मत पाकर तथा 1999 के चुनाव में 15.98 मत ही हासिल कर पाने से जमानत नहीं बचा सके थे। 2004 में राजा महमूदाबाद अमीर मोहम्मद खान कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़े और 11.54 फीसदी मत पाकर चौथे स्थान पर रहे। पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रामलाल राही 2009 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर 16.64 फीसदी मत पाकर तथा 2014 के चुनाव में पूर्व एमएलसी भारत त्रिपाठी सपा के सिंबल पर चुनाव लड़े और 15.21 फीसदी मत हासिल कर जमानत गंवा बैठे थे। 

जमानत गंवाने का यह है गणित

प्रत्याशी को जमानत बचाने के लिए कुल मतदान का 16.66 फीसदी (1/6 हिस्सा) वोट प्राप्त करना जरूरी होता है। किसी प्रत्याशी को अगर कुल मतदान का छठवां हिस्सा (16.66 फीसदी) वोट नहीं मिलते हैं तो नामांकन के समय जमा की गई ज़मानत राशि ज़ब्त कर ली जाती है। इसे जमानत जब्त होना कहते हैं।



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