वहीं, दूसरी ओर बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस में गैस सिलिंडर का स्टॉक रविवार को खत्म हो रहा था। सप्ताह भर पहले कॉमर्शियल सिलिंडर पर रोक लगने के बाद बीएचयू के गेस्ट हाउस को भी आपूर्ति बंद कर दी गई थी। तब सिर्फ छह ही सिलिंडर थे। तीन सिलिंडर से भोजन बन रहा था और बाकी तीन स्टॉक में थे। अब वो तीनों भी रविवार को खत्म होने थे। एलडी में ही यूनिवर्सिटी गेस्ट हाउस का भी खाना बनता है। दोनों में कुल 180 से ज्यादा मेहमान हर दिन रुकते हैं। एलडी गेस्ट हाउस में छह महीने पहले ही गैस पाइपलाइन की एक लाख रुपये की सिक्योरिटी मनी जमा थी लेकिन अभी तक कनेक्शन शुरू नहीं किया गया था। मगर स्थिति बिगड़ने के बाद गेस्ट हाउस के अधिकारियों द्वारा गैस पाइप लाइन जोड़ने की कवायद तेज कर दी गई। प्रो. राकेश सिंह, प्रोफेसर इन-चार्ज एलडी गेस्ट हाउस ने बताया कि गैस की पाइपलाइन लगा दी गई है। रविवार तक यह चालू हो सकता है। यहां पर रुके हुए मेहमानों को भोजन की कोई दिक्कत नहीं आएगी। फिलहाल बीएचयू में हर साल आठ लाख रुपये का गैस खर्च होता है, पाइप लाइन लगने से इसमें पांच लाख रुपये की बचत होगी।
सिलिंडर नहीं मिला, सब्सिडी मिल गई
कलेक्ट्री फार्म निवासी वेद प्रकाश मिश्रा का सुंदरपुर की एचपी रोहिणी गैस एजेंसी में कनेक्शन है। उन्होंने 17 फरवरी को गैस की बुकिंग की और उन्हें 19 फरवरी को सिलिंडर की डिलीवरी का मेसेज मिल गया लेकिन सिलिंडर नहीं मिला। कई बार फोन करने के बाद उन्हें 26 फरवरी को सिलिंडर मिला। लेकिन इसी दिन उनके नंबर पर एक ओर ओटीपी आया और उन्होंने वह डिलीवरी मैन को बता दिया तो उन्हें सिलिंडर तो दूसरी बुकिंग का नहीं मिला लेकिन सब्सिडी मिल गई। वह बार-बार शिकायत कर रहे हैं लेकिन एजेंसी सुनवाई नहीं कर रही है।
अस्सी घाट, गोदौलिया, लंका, रविंद्रपुरी समेत अन्य जगहों पर 70 फीसदी फूड स्टॉल बंद
रविंद्रपुरी, अस्सी, लंका, कबीरनगर, गोदौलिया समेत अन्य क्षेत्रों में 70 फीसदी से अधिक स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने सिलिंडर न मिलने के कारण काम बंद कर दिया। अस्सी घाट पर मैगी-चाय की दुकान लगाने वाले प्रभु साहनी ने बताया कि उनके पास गैस सिलिंडर नहीं है। जिसके कारण दुकान 3 दिनों से बंद है। वहीं घाट पर दुकान लगाने वाले अन्य लोगों ने बताया कि गैस इतनी महंगी हो गई है कि 50 की मैगी अब 60-70 रुपये में बेचनी पड़ रही है। अगले कुछ दिनों में यह भी नहीं मिल पाएगी। रविंद्रपुरी में सबसे अधिक फूड स्टॉल लगते हैं। यहां भी बंद हो गए हैं, पिज्जा का स्टॉल लगाने वाले राकेश शर्मा ने बताया कि गैस सिलिंडर मिल नहीं रहा है और उसके बिना काम नहीं चल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने से हाइवे पर स्थित रेस्टोरेंट व ढाबा अब चूल्हे पर आ गए हैं। यही नहीं, परिषद विद्यालय पर भी अब चूल्हे पर खाना बनने लगे हैं।




