कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति बाधित होने से आगरा में ढाबा संचालकों और मिष्ठान विक्रेताओं के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गैस की कमी के कारण कई दुकानों के किचन बंद हो गए हैं और दुकानदार सीमित उत्पाद बनाकर किसी तरह काम चला रहे हैं।

गैस न मिलने से मिठाइयों और लजीज पकवानों की महक गायब होने लगी है। कई दुकानदारों ने गैस के अभाव में अपने किचन बंद कर दिए हैं, कारीगरों की रोजी-रोटी पर भी संकट है। दुकानदार अब वही उत्पाद बना रहे हैं, जिनमें गैस का प्रयोग कम होता है। कई दुकानदारों ने नाश्ता और चाट की स्टॉल बंद कर रखी हैं। कुछ दुकानदार पीएनजी पर ही निर्भर हैं।

ढाबा संचालक ईश कुमार का कहना है कि कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिल रहा है। फिलहाल पीएनजी से काम चल रहा है। अगर पीएनजी की सप्लाई बाधित हुई तो ढाबा बंद करना पड़ेगा। मिष्ठान विक्रेता तुषार गुप्ता ने बताया कि जिस मिठाईयों में गैस कम खर्च हो रही है, सिर्फ उन्हीं को बना रहे हैं। दो से तीन दिन में मिठाइयों का स्टॉक खत्म हो जाएगा। चाट की स्टॉल भी बंद कर दीं हैं। कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिले तो दुकान बंद करनी पड़ेगी। 

व्यावसायिक गैस किल्लत से कारखानों में तालाबंदी की आहट 

 ईंधन के अभाव में लघु और सूक्ष्म उद्योगों में हजारों भट्ठियां बुझने के कगार पर आ गई हैं। कॉमर्शियल सिलिंडर की किल्लत से कारखानों में तालाबंदी की आहट है। सिकंदरा, नुनिहाई से लेकर नूरी गेट तक गैस नहीं मिलने से सैकड़ों लोगों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। एक तरफ जहां घरेलू गैस सिलिंडर की आपूर्ति को लेकर प्रशासन मुस्तैद होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कॉमर्शियल सिलिंडर की भारी कमी कई उद्योगों की कमर तोड़ रही है। सिकंदरा औद्योगिक क्षेत्र की नमकीन और टेप फैक्ट्रियों से लेकर नूरी गेट के पेठा कारखाने भी प्रभावित हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश कारखानों में गैस का पुराना स्टॉक शुक्रवार तक समाप्त होने वाला है। त्योहारों के बाद से ही नई आपूर्ति ठप पड़ी है। नमकीन उद्योग पर असर पड़ा है। टेकचंद नमकीन के संचालक मनोज बसरानी ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी भट्ठी कॉमर्शियल सिलिंडरों पर टिकी है। नया स्टॉक न मिलने के कारण अब उत्पादन बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। टेप और पैकेजिंग के लिए भी गैस नहीं है। टेप फैक्ट्री संचालक शिव कुमार अग्रवाल का आक्रोश चरम पर है। उन्होंने कहा कि यदि गैस किल्लत का समाधान नहीं हुआ, तो वे अपनी फैक्टरी की चाबियां मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को सौंप देंगे।

गेल ने भेजे नोटिस

उद्यमी न केवल सिलिंडर की कमी से जूझ रहे हैं, बल्कि प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के मोर्चे पर भी निराशा हाथ लग रही है। नुनिहाई क्षेत्र में रबर और फाउंड्री उद्योगों को गेल की ओर से गैस उपयोग घटाने के नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे उद्यमियों में चिंता है। सिकंदरा क्षेत्र में पीएनजी कनेक्शन के आवेदन लंबे समय से लंबित हैं। उद्यमियों का कहना है कि यदि पाइपलाइन की सुविधा होती, तो सिलिंडरों के लिए उन्हें दर-दर नहीं भटकना पड़ता। अगर अगले 24 घंटों में कॉमर्शियल आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो केवल फैक्टरियां ही बंद नहीं होंगी, बल्कि उनमें काम करने वाले हजारों दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। पेठा और नमकीन जैसे उत्पाद, जो आगरा की पहचान हैं, बाजार से गायब हो सकते हैं, जिससे कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है। मनोज बसरानी ने बताया कि हम व्यापार करें या गैस ढूंढें। अफसरों को बार-बार अवगत कराने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। कोई सुनवाई नहीं हो रही। ताला लटकाना अब मजबूरी है।

 



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