टीबी मुक्त भारत अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह अभियान जन-आंदोलन बन चुका है, जिसमें सरकार, मीडिया, डेवलपमेंट पार्टनर्स और समुदाय की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। प्रदेश सरकार ने पोर्टेबल, एआई-सक्षम हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीनों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है, जिसके जरिये बिना लक्षण वाले टीबी रोगियों की पहचान संभव हुई है।
प्रदेश में 930 नैट मशीनों के माध्यम से मरीज को गुणवत्तापूर्ण जांच की जा रही है। यह जानकारी अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण अमित घोष ने दी। बृहस्पतिवार को गोमतीनगर स्थित एक होटल में स्वास्थ्य विभाग व ग्लोबल हेल्थ स्ट्रैटजीज जरिये संयुक्त रूप से एक राज्य स्तरीय कार्यशाला हुई। इस मौके पर उनके जरिये टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश पर ई-न्यूजलेटर का विमोचन किया गया।
उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 7 दिसंबर 2024 को देशभर में 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के प्रथम चरण शुरुआत की गई थी। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ने क्षय रोग उन्मूलन की दिशा में अनुकरणीय प्रदर्शन हेतु भारत सरकार जरिये सम्मानित किया गया है।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में अभियान के दौरान 7 दिसम्बर 2024 से 17 जनवरी 2026 तक कुल 3.02 करोड़ जोखिम वाली आबादी जनसंख्या (वलनरेबल पापुलेशन) की स्क्रीनिंग की गई है। जांच सेवाओं के विस्तार के अंतर्गत जोखिम वाली आबादी की 81.29 लाख एक्स-रे जांचें तथा 24.79 लाख नैट परीक्षण किए गए, जिससे समय पर और सटीक निदान सुनिश्चित हो सका है।
इस व्यापक प्रयास के परिणामस्वरूप 7.33 लाख टीबी रोगियों की पहचान हुई। साथ ही राज्य में लगभग 1.69 लाख बिना लक्षण वाले व्यक्तियों में टीबी की बीमारी का पता चला, जो प्रोएक्टिव स्क्रीनिंग और एडवांस डायग्नोस्टिक के असर को दिखाता है। एनएचएम एमडी डॉ. पिंकी ने बताया कि वर्ष 2015 की तुलना में टीबी के नए रोगियों की दर में 17 प्रतिशत की कमी लाई गई है।
मिशन निदेशक ने बताया कि टीबी रोगियों को उपचार के साथ-साथ सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई निक्षय मित्र पहल के अंतर्गत राज्य में अब तक 98.9 हजार निक्षय मित्रों जरिये 10.3 लाख टीबी रोगियों को पोषण किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र भटनागर ने कहा कि वर्ष 2024 में चलाए गए 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसमें बड़ी संख्या में छूटे हुए टीबी रोगियों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा गया।
इसी अनुभव के आधार पर फरवरी 2026 से प्रदेश में दोबारा 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फरवरी से शुरू होने वाला 100-दिवसीय अभियान उत्तर प्रदेश को टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के और अधिक निकट ले जाएगा। कार्यशाला में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह सुमन, डीजी परिवार कल्याण डॉ पवन कुमार अरुण समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
