सुप्रीम कोर्ट के कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने के आदेश पर नगर निगम ने काम शुरू कर दिया है। दो शेल्टर होम की जमीन तलाशने की कवायद शुरू भी कर दी गई है।
करीब दो महीने पहले कोर्ट ने आदेश दिया था कि शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, सार्वजनिक खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों से लावारिस कुत्ते हटाए जाएं। इन्हें आश्रय स्थल में रखकर नसबंदी की जाए। यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों से कुत्ते हटाए जाएं, उन्हें वहां पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
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एक शेल्टर होम में पांच हजार कुत्ते रखे जा सकेंगे। इस तरह डेढ़ लाख आवारा कुत्तों के लिए नगर निगम को करीब 30 आश्रय स्थल बनाने पड़ेंगे।
…इसलिए नहीं कम हो रही समस्या
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए अभी सिर्फ उनकी नसबंदी की जाती है। उन्हें पकड़कर नहीं रखा जाता है। कुत्ते को नसबंदी के बाद उसी स्थान पर छोड़ा भी जाता है, जहां से पकड़कर लाया गया हो। जितने कुत्तों की नसबंदी होती है, उससे अधिक पैदा होते हैं। नया नसबंदी सेंटर बनाया गया है, जिसे शुरू होने में करीब तीन महीने लगेंगे।
पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा का कहना है कि शासन ने अभी एक शेल्टर होम बनाने के लिए आदेश जारी किया है। इसके लिए जमीन की तलाश चल रही है। आवारा कुत्तों की संख्या ज्यादा है, इसलिए एक और शेल्टर होम के लिए भी जगह तलाश रहे हैं। इन शेल्टर होम में कुत्तों के खाने-पीने से लेकर इलाज तक का इंतजाम रहेगा।
