बच्चों को स्कूल लाने व घर छोड़ने वाली गाड़ियां बच्चों की सुरक्षा से समझौता करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। किसी वैन की खिड़की से ग्रिल ही गायब है तो किसी का शीशा पूरी तरह से टूटा हुआ है। अमर उजाला की पड़ताल में शहर की कई स्कूली वैनों में ऐसी खामियां नजर आईं। एक वैन में आठ बच्चों के बैठने की क्षमता है, लेकिन इनमें 16 बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है। कई वैनों में तो ड्राइवर की बगल वाली सीट पर तीन-तीन बच्चे बैठे नजर आए। अधिक कमाई के लिए चालक यह लापवाही बरत रहे हैं। नियमों की ऐसी अनदेखी से कभी भी हादसा होने की संभावना भी बनी रहती है।
केस 1: सीट को रस्सी से बांधकर चला रहे काम
हजरतगंज स्थित एक स्कूल के बाहर बृहस्पतिवार को एक दर्जन से अधिक स्कूली वैन लाइन से लगी हुई थीं। वैनों की स्थिति खराब थी। कुछ वैनों की सीटें तक टूटी हुई थीं जिन्हें रस्सी से बांधकर काम चलाया जा रहा था।
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केस 2: स्कूल वैन का शीशा भी खराब
नेशनल पीजी कॉलेज के पास स्थित एक स्कूल के बच्चों को लेने पहुंची वैन की स्थिति खराब मिली। वैन की खिड़की पर ग्रिल नहीं थी और शीशा भी खराब था। इससे दुर्घटना होने की भी आशंका नजर आ रही थी।
केस 3: अगली सीट पर तीन-तीन बच्चों की सवारी
सहारा मॉल रोड स्थित एक निजी स्कूल की छुट्टी के दौरान वैन में कई तरह की खामियां नजर आईं। स्कूली वैन की क्षमता आठ से नौ सवारी की थी लेकिन उसमें 13 से 16 बच्चे बैठे थे। ड्राइवर की बगल वाली सीट पर ही तीन बच्चे बैठे थे।
स्कूली वैनों की स्थिति सही करने के निर्देश
आरटीओ प्रवर्तन लखनऊ प्रभात पांडेय का कहना है कि सभी विद्यालयों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों को स्कूली वैन और बसों की स्थिति सही कराने के निर्देश दिए गए हैं। वाहन के रख-रखाव के साथ नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है। ऐसा न करने पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
