केंद्र सरकार ने देश में गैस उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए हैं। इधर, अफसर भी कह रहे हैं कि प्रदेश में गैस सिलिंडर, पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। इन सब के बावजूद शहर में हर गैस एजेंसी पर बुकिंग कराने और सिलिंडर लेने के लिए मारामारी की स्थिति बनी हुई है।
दरअसल, गैस किल्लत का माहौल बनने के साथ मुनाफाखोर सक्रिय हो गए हैं, जिससे कालाबाजारी का धंधा जोरों पर है। सिलिंडरों से गैस चोरी का धंधा भी चार गुना तक बढ़ गया है। इन सब के बावजूद ऐसे लोगों पर नकेल लगाने के लिए जिम्मेदार आपूर्ति विभाग की फौज आराम से सो रही है।
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सूत्र बताते हैं कि एजेंसियों के गोदाम सिलिंडर से भरे हुए हैं, इसके बावजूद डिलीवरी नहीं दी जा रही है। इसके पीछे बुकिंग न होने का बहाना है। जो सिलिंडर वितरण के लिए गोदाम से निकल भी रहे हैं तो उन्हें बीच में गुप्त ठिकानों पर ले जाकर उसमें से गैस चोरी की जा रही है। आपूर्ति विभाग न गैस गोदामों में स्टॉक की जांच कर रहा है, न जमाखोरों के ठिकानों की पड़ताल।
वितरण के लिए जा रहे सिलिंडरों की रेंडम जांच भी नहीं हो रही। घरेलू सिलिंडरों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी जिम्मेदारों ने आंखें बंद कर रखी हैं, जिसका फायदा गैस एजेंसी के वितरण नेटवर्क से जुड़े ठेकेदार कालाबाजारी करके उठा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर हेल्पलाइन नंबर भी जारी नहीं किया गया है, जिस पर लोग शिकायत दर्ज करा सकें।
कालाबाजारी के धंधे पर अंकुश नहीं
जब से गैस सिलिंडरों की किल्लत शुरू हुई, तब से कालाबाजारी का धंधा जोरों पर है। तमाम गोदाम और गोपनीय जगहों पर घरेलू सिलिंडर से गैस निकालकर 19 किलो के व्यावसायिक सिलिंडर तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें 4000 रुपये तक बेचा जा रहा है। मुख्यमंत्री की चेतावनी के बाद भी आपूर्ति विभाग ने गैस चोरी करने वालों और कालाबाजारी के खिलाफ कोई ठोस मुहिम शुरू नहीं की है।
