यूजीसी के नए नियमों के विरोध में बुधवार को भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन हुए। शिक्षण संस्थानों में छात्रों और शिक्षकों ने बैनर पोस्टर लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रयागराज में हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर इसे पूरी तरह से वापस लेने की मांग की।
ब्रज में आगरा, फिरोजाबाद , मैनपुरी, एटा और कासगंज में सवर्ण समाज ने कलेक्ट्रेट समेत अन्य स्थानों पर धरना देकर प्रदर्शन किया। मऊ में नगर क्षेत्र के ताजोपुर में भाजपा के एक सेक्टर अध्यक्ष, पांच बूथ अध्यक्ष सहित 20 कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देकर पार्टी का झंडा भी फूंका।
गाजियाबाद में विश्व ब्रह्रमर्षि ब्राह्मण महासभा के सदस्यों ने हाथों में बेड़ियां और तन पर कफन पहनकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। हापुड़ और बुलंदशहर में भी प्रदर्शन किया गया। पीलीभीत में भाजपा के दूसरे बूथ स्तरीय पदाधिकारी ने यूजीसी को काला और भेदभावपूर्ण कानून बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
हाथरस के मुरसान में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अलीगढ़ मंडल अध्यक्ष व राष्ट्रीय सचिव राम ठाकुर ने राष्ट्रपति के नाम खून से लिखा पत्र कलेक्ट्रेट पहुंचकर एडीएम को सौंपा। वाराणसी में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने काशी विद्यापीठ को बंद करवा दिया। विरोध की वजह से स्नातक, स्नातकोत्तर की परीक्षा भी टालनी पड़ी।
उधर, राष्ट्रीय हिंदू दल संगठन की ओर से पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखकर नियमावली को तत्काल वापस लेने की मांग की है। वहीं, दूसरी तरफ रामपुर के बिलासपुर में राष्ट्रीय पटेल महासभा के कार्यकर्ताओं ने समर्थन में जुलूस निकालकर राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा।
