एक पखवाड़े से घरेलू गैस के लिए मारामारी मची हुई है। अमर उजाला की टीम ने सिलिंडरों की कालाबाजारी की थाह लेने के लिए सोमवार को उपभोक्ता बनकर शहर में कई जगह पड़ताल की। बहुत से गैस डिलीवरीमैन को टटोला। कुछ थोड़ी बातचीत में ही खुल गए।
उन्होंने यकीन दिलाया कि दो से तीन हजार रुपये दीजिए और अपने घर पर सिलिंडर की डिलीवरी लीजिए। आज पढ़िए कैसे खुला सिलिंडरों के सौदागरों का खेल…। हम किसी एजेंसी या डिलीवरीमैन की पहचान उजागर नहीं कर रहे क्योंकि हमारा उद्देश्य सिर्फ बाजार में चल रहे इस कालाबाजारी के खुलासा करना है। किसी व्यक्ति को खलनायक सिद्ध करना नहीं है।
तीन हजार लेकर घर पर पहुंच गए सोमवार महानगर वायरलेस चौराहे के पास खड़े दो युवक आपस में बातें कर रहे थे। पास खड़ी उनकी स्कूटी में बोरी में लिपटा एक सिलिंडर था। संवाददाता ने उनसे पूछा कि भाई क्या कहीं गैस मिल पाएगी। पहले तो युवकों ने ना में सिर हिलाया। बाद में जब उन्हें यह बताया गया कि ईद मिलने कुछ रिश्तेदार घर आ रहे हैं और गैस खत्म हो गई है।
एक युवक ने कहीं फोन मिलाने के बाद बताया कि मिल जाएगी लेकिन तीन हजार में। युवक ने कहा कि सिलिंडर यहां नहीं देंगे। आप घर की लोकेशन भेज दीजिए, वहीं पहुंच जाएगा। यह भी बताया कि कुछ देर पहले ही एक व्यक्ति को घर पर सिलिंडर देकर आया हूं।
वहीं से खाली सिलिंडर लेकर लौटा हूं। आप थोड़ी देर पहले आते तो वो सिलिंडर आपको मिल जाता। संवाददाता ने युवक को व्हाट्सएप पर लोकेशन दे दिया। करीब आधे घंटे बाद वह भरा हुआ सिलिंडर लेकर आया और तीन हजार रुपये ले गया।
