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– फोटो : अमर उजाला
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विधान परिषद की दो सीटों के उपचुनाव के लिए भाजपा के बाद सपा प्रत्याशियों ने भी बृहस्पतिवार को नामांकन कर दिया। इससे निर्विरोध नजर आ रहे उपचुनाव में मतदान तय हो गया है। संख्या बल के हिसाब से जीत की कोई गुंजाइश न नजर आने के बावजूद सपा की दावेदारी से यह उपचुनाव कई मायने में महत्वपूर्ण हो गया है।
परिषद के सदस्यों का चुनाव विधानसभा के सदस्य करेंगे। सभी सदस्य दोनों ही सीटों के लिए अलग-अलग वोट करेंगे। इस तरह से हार-जीत का फैसला बहुमत से होगा। विधानसभा के 403 सदस्यीय सदन में प्रत्येक सीट के लिए मतदान में पड़े मतों में आधे से एक अधिक वोट जीत के लिए चाहिए।
सभी वोट पड़ने पर जीत के लिए 202 वोट जरूरी होंगे। सत्ताधारी भाजपा व सहयोगी दलों को मिलाकर 274 सदस्य हैं। यह संख्या जीत के लिए आवश्यक मतों से बहुत ज्यादा है। इसके बावजूद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने प्रत्याशी उतार दिए। बताया जा रहा है कि सपा ने रणनीति के तहत पूर्वांचल के मऊ से अति पिछड़ा वर्ग से रामजतन राजभर और कौशांबी से अनुसूचित जाति के रामकरन निर्मल को प्रत्याशी बनाया है। रामजतन एमएलसी रह चुके हैं और निर्मल लोहिया वाहिनी के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष हैं।
भाजपा ने लोकसभा चुनाव से पहले संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को महत्व देते हुए रणनीति के तहत पार्टी पदाधिकारियों को मौका दिया है। दोनों ही प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष हैं। अवध के बहराइच से पदमसेन चौधरी पिछड़ा वर्ग के कुर्मी समाज व बुंदेलखंड के कानपुर निवासी मानवेंद्र सिंह क्षत्रिय समाज से हैं।
