
दो हजार रुपये के नोट
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कोलकाता के कारोबारी गोयनका के जरिए कानपुर और लखनऊ के बुलियन और सराफा कारोबारियों के खातों में कई संदिग्ध लेन-देन हुए थे। इसकी भनक लगने के बाद आयकर विभाग ने जब इन कारोबारियों के बैंक खातों के विवरण को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि बड़े पैमाने पर नगदी को भी कई बैंक खाते खोलकर खपाया जा रहा था। इसकी शिकायत कुछ बैंकों ने भी आयकर विभाग से की थी, जिसके बाद इन कारोबारियों के ठिकानों को खंगालने का फैसला लिया गया।
कानपुर और लखनऊ के बुलियन और सराफा कारोबारियों के ठिकानों पर दूसरे दिन भी आयकर विभाग के अधिकारी तलाशी अभियान अंजाम देते रहे। फिलहाल आयकर विभाग ने अब तक टैक्स चोरी की रकम और बरामदगी का खुलासा नहीं किया है। सूत्रों की मानें तो करीब एक दर्जन से अधिक कारोबारियों ने 1500 करोड़ रुपये की रकम की हेराफेरी अंजाम दी है।
जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए इस रकम को रियल एस्टेट के कारोबार में भी खपाया गया है। छापों के दौरान कानपुर के राधा मोहन पुरुषोत्तम दास ज्वेलर का कोलकाता की कुछ शेल कंपनियों से लेन-देन करने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इसका सीधा संबंध छापों की जद में आए लखनऊ के सराफा कारोबारियों अमित अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, रमेश खन्ना, ऋषि खन्ना से भी बताया जा रहा है।
दो हजार के नोट लेकर खूब बेचा सोना
जांच में सामने आया है कि सराफा कारोबारियों ने दो हजार रुपये के नोट लेकर सोना बेचा, बाद में इस रकम को 500 के नोट में बदलवाया गया। आयकर विभाग के अधिकारी ये पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस तरीके से कितने करोड़ रुपये का सोना बेचा गया। जांच में किसी भी कारोबारी के बही-खातों में सोना बेचने का जिक्र अब तक नहीं मिला है। फिलहाल सभी 50 ठिकानों पर छापों की कार्रवाई जारी है।
