Lucknow: Shock to Hepatitis control program, patients are not getting free medicine, eight to 10 thousand rupe

हेपेटाइटिस
– फोटो : SELF

विस्तार

प्रदेश में हेपेटाइटिस के मरीजों को निशुल्क दवा नहीं मिल पा रही है। इस बीमारी से ग्रसित मरीजों को हर माह आठ से 10 हजार रुपये की दवा खरीदनी पड़ रही है। सुविधा संपन्न मरीज दवाएं खरीद रहे हैं, लेकिन गरीब मरीज दवा खाना छोड़ दे रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम फेल हो रहा है। इस कार्यक्रम में प्रदेश में करीब 25 हजार से ज्यादा मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। हर माह इन मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में हेपेटाइटिस ए, बी, सी की निशुल्क जांच एवं पॉजिटिव मिलने वाले मरीजों को निशुल्क दवा देने का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में केजीएमयू, बीएचयू सहित 12 मेडिकल कॉलेजों को उपचार केंद्र बनाया गया है।

 

प्रदेश में करीब 25 हजार से ज्यादा मरीजों की नियमित दवा चल रही है। जबकि इनकी संख्या हर दिन बढ़ रही है। हर उपचार केंद्र से आसपास के जिलों के मरीजों को निशुल्क दवा उपलब्ध कराई जाती है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सभी सेंटरों पर दवा उपलब्ध होने का दावा करता है, लेकिन अमर उजाला ने उपचार केंद्रों की पड़ताल की तो पता चला कि करीब दो माह से केंद्रों पर दवाएं नहीं हैं।

 

सेंटरों की ओर से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। पिछले सप्ताह कुछ सेंटर को हेपेटाइटिस ए की दवाएं भेजी गई हैं, लेकिन हेपेटाइटिस बी एवं सी की दवाएं खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में इन सेंटरों ने नए मरीजों को दवा देना बंद कर दिया है। जो दवाएं उपलब्ध हैं, उन्हें पुराने मरीजों को देकर काम चलाया जा रहा है।

दवा देने में भी बरती जा रही सावधानी

सूत्रों के मुताबिक कार्यक्रम को पूरी तरह से फेल होने से बचाने के लिए भी नए- नए प्रयोग किए जा रहे हैं। दवा का अभाव होने की वजह से जिन मरीजों का लंबे समय से इलाज चल रहा है, उन्हें उपलब्ध कराया जाता है। जो नए मरीज आते हैं, उन्हें निशुल्क दवा की जानकारी नहीं दी जाती। यह कहकर लौटाया जा रहा है कि अब दवा आनी बंद हो गई है। ऐसे में ये मरीज हर माह आठ से 10 हजार रुपये की दवा खरीदने के लिए विवश हैं। जो मरीज इतना खर्च नहीं उठा पाते हैं, वे उपचार छोड़ दे रहे हैं।

ये हैं प्रमुख उपचार केंद्र

केजीएमयू लखनऊ, बीएचयू वाराणसी, एलएलआरएम कॉलेज मेरठ, बीआरडी गोरखपुर, एसएनएमसी आगरा, एमएलबी मेडिकल कॉलेज झांसी, राजकीय मेडिकल कालेज बांदा, अलीगढ़, अयोध्या, बहराइच, सहारनपुर, यूपीयूमएस सैफई से आसपास के जिलों को जोड़ा गया है। सर्वाधिक 13 जिले केजीएमयू से जुड़े हैं। यहां प्रदेश के अन्य जिलों के मरीज भी पहुंचते हैं। जबकि बांदा और आगरा से सिर्फ तीन-तीन जिलों को जोड़ा गया है।

क्या कहते हैं उपचार केंद्र प्रभारी

– हमारे यहां पूरे प्रदेश से मरीज आते हैं। पुराने मरीजों को दवा दी जा रही है, लेकिन नए मरीजों को नहीं दे पा रहे हैं। इसके लिए डिमांड भेजी गई है। – डा. सुमित रूंगटां केजीएमयू।

– हेपेटाइटिस ए की कुछ दवाएं हैं। बी, सी की दवा खत्म हो गई है। गंभीर मरीजों के लिए संकट हैं।

– डा. अरविंद कुमार, मेरठ

– दवा का अभाव है। आर्डर भेज दिया गया है। आश्वासन मिला है कि जल्द ही दवाएं उपलब्ध कराई जाएँगी।

– डा. सूर्य कमल आगरा

– दवा की बेहद जरूरत है। कई बार मांगपत्र भेजा जा चुका है। पूरे प्रदेश में दवा की कमी बताई जा रही है।

– डा बीके गौतम

– पहले कमी थी, लेकिन अब करीब 600 गोली आ गई है। अन्य दवाएं एक- दो दिन में आ जाएंगी।

– डा. पियूष गुप्ता, अयोध्या

ये है सरकारी दावा

हेपेटाइटिस से जुड़ी दवाएं कुछ सेंटरों पर भेजवा दी गई हैं। इसकी दवाएं केंद्र से भी उपलब्ध कराई जाती हैं। अब कुछ दवाएं आ गई हैं। जिन सेंटरों ने डिमांड भेजी थी, वहां दवा उपलब्ध कराई गई है। मरीजों की संख्या के अनुसार दवाएं भेजवाई जा रही हैं।

– डा. विकाशेंदु अग्रवाल, प्रभारी राज्य हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम

क्या कहते हैं जिम्मेदार

ट्रीटमेंट सेंटरों पर दवा नहीं होने की वजह पता करते हैं। यदि कमी होगी तो जल्द से जल्द दवा उपलब्ध कराई जाएगी। मरीजों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

– पार्थ सारथी सेन शर्मा, प्रमुख सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग।

सिर्फ एक दवा का हो रहा है टेंडर

यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को सिर्फ इंटेक्विर 1 एमजी की दवा खरीदने के लिए कहा गया है। इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। अन्य दवाएं यहां से नहीं भेजी जाती हैं। ये दवाएं भारत सरकार से सीधे डिपो को मिलती हैं।

– जगदीश प्रबंध निदेशक यूपीएमएससी

क्या है हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस वायरस की वजह से लिवर में संक्रमण होता है। समय पर उपचार नहीं होने पर सिरोसिस या कैंसर जैसे गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है और मरीज की मौत हो जाती है। यह संक्रमण विषाक्त पदार्थ खाने, शराब, कुछ दवाएं और ऑटोइम्यून रोग की वजह से भी होता है। इसकी अलग- अलग कैटेगरी को ए, बी, सी, डी और ई के रूप में बांटकर इलाज किया जाता है।

हेपेटाइटिस बी और सी के मरीज ज्यादा हैं। हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर दूषित भोजन या पानी पीने, दूषित रक्त व इंजेक्शन से होता है। जन्म के समय मां से बच्चे में हेपेटाइटिस तथा संक्रमित व्यक्ति से यौन संपर्क द्वारा भी यह संक्रमण होता है। इसका असर होने पर पेट दर्द,पीला मूत्र आना, बुखार, जोड़ों का दर्द, भूख न लगना, मतली व उल्टी, कमजोरी और थकान और त्वचा का पीला पड़ना और आँखों का सफेद होना आदि है।

– डा. आकाश माथुर, असिस्टेंट प्रोफेसर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एसजीपीजीआई



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