लखनऊ। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को दरकिनार कर अपने स्तर पर भर्ती परीक्षा कराना केजीएमयू और पीजीआई को भारी पड़ रहा है। केजीएमयू की 2023 की नर्सिंग ऑफिसर भर्ती और पीजीआई की हॉस्पिटल अटेंडेंट ग्रेड-2 परीक्षा जांच के घेरे में हैं। दोनों मामलों की जांच एसटीएफ कर रही है।
केजीएमयू में 1,276 नर्सिंग ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए 2023 में विज्ञापन निकाला गया था। इसमें 63 हजार से अधिक आवेदन आए और 1,172 अभ्यर्थियों ने जॉइन किया। आरोप है कि विज्ञापन में ऑनलाइन परीक्षा का उल्लेख था, लेकिन बाद में इसे ओएमआर आधारित कर दिया गया। चयन सूची में अनारक्षित वर्ग के 510 पदों पर उत्तर प्रदेश के केवल 160 अभ्यर्थी चुने गए, जबकि राजस्थान के 209 और दिल्ली के 46 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। विधायकों की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसटीएफ ने जांच शुरू की और कुलपति व कुलसचिव कार्यालय से गोपनीय फाइलें जब्त कीं।
वहीं, अब पीजीआई की हॉस्पिटल अटेंडेंट ग्रेड-2 भर्ती परीक्षा भी विवादों में आ गई है। रविवार को गोमतीनगर के तीन परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी खामी का हवाला देकर परीक्षा स्थगित कर दी गई। सुबह से पहुंचे अभ्यर्थियों ने पेपर लीक की आशंका जताते हुए हंगामा किया। अब इस मामले की जांच भी एसटीएफ को सौंपी गई है।

