मिशन 2024 में रायबरेली संसदीय सीट से फतह की तैयारी

कांग्रेस व सपा में चल रही खींचतान का भी भरपूर फायदा उठाना चाहेगी भारतीय जनता पार्टीसपा के साथ बसपा ने दिया झटका तो कांग्रेस की आसान नहीं होगी लोकसभा चुनाव की राह

रायबरेली। भाजपा किसी कीमत पर 2019 में अमेठी की तरह रायबरेली सीट को 2024 में अपनी झोली में डालने के लिए बेताब है। यही वजह है कि एक के बाद एक सूरमाओं को चुनाव की जिम्मेदारी दी जा रही है। भाजपा ने पीयूष मिश्रा को जिले का प्रभारी बनाकर सीधे ब्राम्हण कार्ड खेला है। इसके पहले भी भाजपा कई दिग्गजों को मैदान में उतारकर जिले में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है।

साल 2004 से 2019 तक लगातार सोनिया गांधी यहां से सांसद हैं और कांग्रेस आगे भी सोनिया या फिर उनकी बेटी प्रियंका को सांसद बनाने का सपना देख रही है। 2019 में सोनिया के सामने भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए एमएलसी और वर्तमान में प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था। दिनेश प्रताप चुनाव जीत तो नहीं पाए थे, लेकिन सोनिया के जीत के वोट के अंतर को कम कर दिया था। बाद में निकाय चुनाव में भाजपा को झटका लगा।

इस बार भाजपा कोई चूक नहीं चाहती है। यही वजह है कि पिछले एक साल से कोई न कोई नया दांव लगाकर यहां से पार्टी को मजबूती दी जी रही है। निकाय चुनाव के बाद भाजपा ने सबसे पहले बीते सिंतबर में दलित समाज का जिलाध्यक्ष बुद्धिलाल पासी को बनाकर यह संदेश दिया कि पार्टी दलितों की हितैषी है। अब ब्राह्मण को लोकसभा का जिला प्रभारी बनाकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि वह ब्राह्मणों को साथ लेकर चलेगी। इसके पहले से ही यहां लोकसभा संयोजक का कार्य देखते हुए आरबी सिंह संगठन को धार देने में लगे हुए हैं। वीरेंद्र तिवारी लोकसभा प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इतना ही नहीं पिछड़ी जाति से दिलीप यादव को जिलाध्यक्ष पद से मुक्त कर क्षेत्रीय मंत्री का दायित्व सौंपा और रामदेव पाल को जिलाध्यक्ष पद से हटाकर उनकी जिम्मेदारी बढ़ाई जा सकती है।

मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई प्रदेशों में विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर कांग्रेस और सपा की तीखी तकरार जग जाहिर है। यदि लोकसभा में सपा यहां से अपना उम्मीदवार उतारती है और बसपा झटका देती है तो कांग्रेस कमजोर होगी और इसका फायदा लेने के लिए भाजपा अपने तरकश से सारे तीर चला रही है। पिछले कई चुनाव में सपा ने सोनिया के सामने उम्मीदवार नहीं उतारा। 2024 के चुनाव में किसका डंका बजेगा, यह तो भविष्य के गर्त में है, लेकिन आमजनमानस के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी के सामने भाजपा का स्थानीय नेता चुनाव मैदान में उतरेगा या फिर बाहरी नेता पर दांव लगाया जाएगा। (संवाद)

पीयूष मिश्रा निभा चुके हैं कई दायित्व

जिला प्रभारी बनाए गए पीयूष मिश्रा कई जिम्मेदार पदों का दायित्व संभाल चुके हैं। वह गोंडा के जिलाध्यक्ष के साथ क्षेत्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश स्तर पर चुनाव प्रबंधन का कार्य कर रहे हैं। फोन से बातचीत में जिला प्रभारी ने बताया कि प्रदेश स्तर से जो जिम्मेदारी दी गई है, उसे बखूभी निभाना है। संगठन को मजबूत करने के साथ अधिक से अधिक लोगों को भाजपा से जोड़ना है।



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