रायबरेली। जिले में लू और गर्मी का कहर थम नहीं रहा है। गर्मी से लोग बेहाल हो गए हैं। जांच में युवक डेंगू से संक्रमित मिला है। इसके अलावा मंगलवार को बुखार-डायरिया के चपेट में आने के बाद 21 मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिला अस्पताल के वार्डों में लगे पंखों व कूलर मरीजों को गर्मी से नहीं बचा पा रहे हैं। मरीज वार्डों में पसीना-पसीना हो रहे हैं। ओपीडी में भी सुबह से ही मरीजों की लंबी लाइन लगी रही।
जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए डलमऊ क्षेत्र के भीरागोविंदपुर निवासी लवकुश (25) की जांच की गई तो वह डेंगू संक्रमित मिला। स्वास्थ्य विभाग की रिस्पांस टीम ने मरीज के घर पहुंचकर लोगों की सेहत जांची है। ग्रामीणों को गर्मी और मच्छरों से बचने की सलाह दी है। जिला अस्पताल में मंगलवार को भर्ती कराए गए मरीजों में नैनसी (10), अमन (2), नुसरत फातिमा (60), रोशनी (23), आरिफ (30), सरोजनी (30), सोनिया (20), अनुजा (1), सूरज (2), लकी (7), अदनान (35), लियाकत अली (65), पियूसिखा (3), दानिश (30), सैयद अहमद (51) शामिल हैं। इसके अलावा मोनी और ममता के नवजातों को भी इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। जिला अस्पताल के वार्डों में गर्मी अधिक होने के कारण पंखे व कूलर काम नहीं कर रहे हैं। ओपीडी में भी मरीज गर्मी से बेहाल रहे।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सीएचसी-पीएचसी में जनरेटर नहीं चलाए जाते हैं। ऊपर से बिजली कटौती भी खूब हो रही है। ऐसी स्थिति में भर्ती होने वाले मरीजों को गर्मी से परेशान होना पड़ता है। सीएचसी स्तर पर कोई भी अधिकारी मरीजों की समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। बछरावां सीएचसी अधीक्षक डॉ. एके जैसल का दावा है कि 15 दिन में सात घंटे जनरेटर चलाया है। वहीं खीरों के अधीक्षक का दावा है कि 15 दिन में 10 घंटे जनरेटर चलाया गया है। डीजल की व्यवस्था न होने के कारण जनरेटर चलवाने में समस्या हो रही है। इनवर्टर से काम चलाया जा रहा है।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सलीम का कहना है कि लू लगने का सबसे अधिक खतरा बच्चों व बजुर्गों को होता है, क्योंकि उनके शरीर का तापमान नियंत्रित करने का सिस्टम ठीक नहीं होता है। जो लोग धूप में अधिक देर तक काम करते हैं, उन्हें भी लू लगने की आशंका रहती है। शरीर से जितना पसीना निकलता है, उसके अनुपात में इलेक्ट्रोलाइट पानी पीने की भी जरूरत होता है। गर्मी में ओआरएस का घोल पीने की सलाह दी जाती है।
