राजधानी लखनऊ में दो हजार से अधिक पालतू बिल्लियां हैं, लेकिन लाइसेंस महज 25 के ही बने हैं। ऐसे में अब नगर निगम अभियान चलाएगा। इससे पहले पेट क्लीनिकों और स्टोरों से उन लोगों की जानकारी जुटाएगा, जिन्होंने बिल्ली पाल रखी है। 

अभी तक नगर निगम पालतू कुत्तों के ही लाइसेंस बनाता था, लेकिन करीब चार महीने पहले बिल्लियों के लाइसेंस की भी व्यवस्था लागू की है। इसके लिए 500 रुपये शुल्क तय किया है। बिना लाइसेंस बिल्ली पालने पर 1000 रुपये जुर्माना भी तय किया है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद चार महीने में 25 लोगों ने ही लाइसेंस बनवाया है।

नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा का मानना है कि बिल्लियों को पालने का चलन बढ़ा है। इस समय शहर में पालतू बिल्लियों की संख्या दो हजार से अधिक होगी, जबकि लाइसेंस बहुत कम बने हैं। इसलिए बिल्लियों के लाइसेंस को लेकर अभियान चलाया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि बिल्लियां लोग घरों में ही रखते हैं, उन्हें टहलाने बाहर नहीं लाते, ऐसे में किन लोगों ने बिल्लियां पाली हैं, इसका पता लगाने के लिए पेट क्लीनिक और स्टोर वालों से जानकारी जुटाई जाएगी। क्योंकि, लोग उनके लिए खाने का सामान और दवाएं खरीदने जाते हैं।



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