
रायबरेली में बुधवार को बस स्टेशन में खड़ी बसों के टूटे शीशे
ठंड में ठिठुरते हुए यात्रा करने को मजबूर मुसाफिर
हादसों की आशंका, अनुबंधित बसों के संचालकों को दुरुस्त कराने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
रायबरेली। सर्दी और कोहरे का समय आ गया है। रात और सुबह कोहरा बढ़ गया है। रोडवेज बसों में फाॅग लाइटें नहीं लगी हैं। लंबी दूरी की बसों में यह लाइटें लगाई गई हैं, लेकिन लोकल रूटों की बसों में फाॅग लाइटों का इंतजार है। कई बसों के शीशे भी टूट गए हैं या फिर चटक गए हैं। ऐसे में हादसों की आशंका के साथ ही रात में यात्रा करने वाले यात्रियों को ठिठुरना पड़ रहा है। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने अनुबंधित बसों के संचालकों को बसों को तीन दिन में दुरुस्त कराने के आदेश दिए हैं।
रायबरेली डिपो से 152 बसें संचालित हैं। इनमें 61 बसें डिपो की हैं और 91 बसें अनुबंधित हैं। इन बसों से प्रतिदिन 25 हजार से ज्यादा मुसाफिर सफर तय करते हैं। हकीकत ये है कि 40 प्रतिशत से ज्यादा बसों में फाॅग लाइट नहीं लगी हैं। बैक लाइट, इंडिकेटर भी ठीक हालत में नहीं हैं। कुछ बसों में शीशे भी चटके हैं। अब तक उन्हें बदलवाया नहीं गया। ऐसे में रात में सफर करने पर तेज हवा अंदर आती है। कोहरे में फाॅग लाइट नहीं रहने पर सामान्य लाइट से ज्यादा परेशानी होती है। सड़क स्पष्ट नहीं दिखती है। इससे दुर्घटना की आशंका है। कई बसों की बैक लाइट व रिफ्लेक्टर भी खराब है। ठंड और कोहरे को देखते हुए एआरएम ने अनुबंधित बसों के संचालकों को तीन दिन में बसों के शीशे ठीक कराने के साथ ही फाॅग लाइटें लगवाने के निर्देश दिए हैं। बसों में अन्य खामियों को भी दुरुस्त कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे यात्रियों को यात्रा करने में परेशानी न हो।
रोजाना वर्कशॉप में एआरएम चेक करते बसें
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने हर रोज सुबह छह से आठ बजे तक वर्कशॉप में पहुंचकर बसों को चेक करने की व्यवस्था शुरू की गई। स्वयं ही वर्कशॉप में पहुंचकर बसों को चेक करते हैं। दुरुस्त होने पर ही डिपो से संचालित होने के लिए भेजा जा रहा है। कमियां मिलने पर तत्काल दुरुस्त कराया जा रहा है। अन्य कर्मचारियों को भी वर्कशॉप में बसों के आने बाद और जाने से पहले चेक करने के निर्देश दिए गए हैं।
रोडवेज बस से संबंधित खबर का इनसेट
अफसर समस्या पर दें ध्यान
सप्ताह में एक बार कारोबार के सिलसिले में लखनऊ जाना पड़ता है। घर पहुंचने में रात हो जाती है। ऐेसे में बस से सफर करना मुश्किल होता है, क्योंकि शीशे टूटे होने के चलते हवा अंदर आती और ठंड लगती है। अफसरों को लोगों की इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए।
-संजय अग्निहोत्री, दवा व्यवसायी
हादसे का बना रहता खतरा
कारोबार के सिलसिले में सलोन आना जाना रहता है। बस से ही सफर करना पड़ता है। सर्दी का सीजन शुरू होने के बावजूद बसों में फाॅग लाइटें नहीं लगाई गई हैं। इससे रात के वक्त हादसे का खतरा रहता है। साथ ही बसों के शीशे टूटे होने के चलते ठिठुरना पड़ता है।
-रिजवानुल हक, कपड़ा व्यापारी
शीशे रहते ढीले, स्वयं से खिसक जाते
कारोबार के सिलसिले में सप्ताह में तीन बार लखनऊ आना जाना रहता है। घर पहुंचने में देर रात हो जाती है। दिन में तो ठीक रहता है, लेकिन रात में बसों के शीशे टूटे होने के चलते ठिठुरन महसूस होती है। कुछ शीशे ढीले होने के चलते खिसकर बार-बार खुलते और बंद हुआ करते हैं। इससे समस्या होती है।
-सनी, इलेक्ट्राॅनिक्स व्यापारी
लंबी दूरी की बसों में लगी हैं फाॅग लाइटें
डिपो की सभी बसें दुरुस्त हैं। अनुबंधित बसों को तीन दिन में दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। लंबी दूरी और रात में चलने वाली बसों में फाॅग लाइटें लग चुकी हैं। लोकल रूटों की बसों में भी लाइटें लगवाई जा रही हैं। बसों के शीशे ठीक हैं। वर्कशॉप में चेक करने के बाद ही जाने दिया जाता है।
-एमएल केसरवानी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक
