जिला अस्पताल के साथ ही नसीराबाद, ऊंचाहार सीएचसी में मरीजों की बढ़ी संख्या
संक्रामक रोग की रोकथाम में जागरूकता अभियान के नाम पर हो रही खानापूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
रायबरेली। जिले में अब बड़ों के साथ ही मासूमों पर भी बुखार का कहर शुरू हो गया है। रविवार को 30 लोग बुखार की चपेट में आए। इसमें बच्चे भी शामिल रहे। इन सभी को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। एक तरफ रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है, वहीं इलाज के नाम पर महज खानापूर्ति बरती जा रही है। यहां तक स्वास्थ्य विभाग लोगों को संक्रामक बीमारी के प्रति जागरूक करने के नाम पर महज कागजी घोड़ा दौड़ा रहा है। सीएचसी-पीएचसी के चिकित्सक बाहर से मरीजों को दवाएं लिख रहे हैं।
मौसम मेंं उतार-चढ़ाव के कारण संक्रामक रोग तेजी से पैर पसार रहा है। मलेरिया विभाग में मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए चेकिंग टीम बनाई गई है, लेकिन मलेरिया निरीक्षक इस कार्य को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यही वजह है कि संक्रामक बीमारी का कहर तेजी से बढ़ रहा है। जिला अस्पताल में रमन (3), दीपाली (4), कृष्णा (6), आयूष (9), निखिल (19), सुष्मिता (80), पूजा (8), आयुष (9), राज गुप्ता (3) को बुखार की चपेट में आने पर भर्ती किया गया। इसके अलावा15 रोगियों को बुखार आने पर इमरजेंसी कक्ष में इलाज करने के बाद घर जाने दिया गया।
यही नहीं मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद जिला अस्पताल के बेड फुल हो गए हैं। इससे मरीजों को भर्ती करने में परेशानी आ रही है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. महेंद्र मौर्या ने बताया कि बुखार के मरीजों का बेहतर इलाज करने के प्रयास किए जा रहे हैं। नसीराबाद सीएचसी में अशरफपुर निवासी वैरुननिशा, नसीराबाद निवासी रामकिशोर को बुखार से पीडि़त होने पर भर्ती किया गया। ऊंचाहार सीएचसी में अंश, किरन, विजय लक्ष्मी, मंजू देवी, कांती यादव, राज निर्मल, लवकुश, आदर्श, मुस्कान, सुशीला देवी, नीलम त्रिपाठी, कंचन, रीता, राम बहादुर, सरिता, रामपती, लाडो, विनोद समेत 19 मरीज भर्ती किए गए।
लाडले छींके तो रहें होशियार
सीएमएस का कहना है कि इस मौसम में सबसे अधिक ध्यान छोटे बच्चों का रखना पड़ता है। मौसम बदलने पर सबसे अधिक संक्रमण का खतरा बच्चों को ही रहता है। यदि लाडलों की छींक आ रही है तो होशियार हो जाएं, क्योंकि छींके आने का संकेत है कि उन्हें सर्दी, जुखाम हो रहा है। इसके बाद बुखार के चपेट में बच्चे आ जाते हैं।
