रायबरेली। लखनऊ-रायबरेली हाईवे पर लगने वाले जाम से जल्द राहत मिल सकेगी। इसके लिए रतापुर और त्रिपुला चौराहे पर ओवरब्रिज का निर्माण कराया जाएगा। निर्माण के लिए चार गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। दोनों ओवरब्रिज के निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
भूमि अधिग्रहण के लिए तीन गांवों में सर्वे का काम पूरा हो गया है। एक गांव में सर्वे होना है। जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कर ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कराया जाएगा। लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर प्रतिदिन करीब पांच लाख लोग सफर करते हैं।
शहर के अंदर प्रवेश करते वाहन चालकों को त्रिपुला चौराहे पर लगने वाले जाम से जूझना पड़ता है। इसी चौराहे से रायबरेली-महराजगंज मार्ग निकला है। इसके चलते जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। यही हाल रतापुर चौराहे का भी है।
इस चौराहे से जगदीशपुर हाईवे निकला है। इसके चलते लगने वाले जाम से वाहन चालक परेशान होते हैं। जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने करीब दो साल पहले ओवरब्रिज का निर्माण कराने का निर्णय लिया था।
इस पर व्यापारियों ने विरोध शुरू कर दिया जिसके चलते कार्रवाई रुक गई। इस पर एनएचएआई ने जिला प्रशासन से सहयोग मांगा। प्रशासन के दखल से ओवरब्रिज निर्माण का रास्ता साफ हो पाया।
इन गांवों की ली जाएगी जमीन
ओवरब्रिज निर्माण के लिए रतापुर, किसुनदासपुर रामचंदर, गोकुलपुर और बरईपुर गांव के करीब 200 लोगों की जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। रतापुर, गोकुलपुर और बरईपुर में जमीन के सर्वे का काम पूरा हो गया है। इन जमीनों पर ज्यादातर लोगों के भवन व प्रतिष्ठान बने हैं। अधिग्रहण के बाद उन्हें धराशायी किया जाएगा।
800 मीटर में बनेंगे ओवरब्रिज
रतापुर और त्रिपुला चौराहों पर बनने वाले ओवरब्रिजों की लंबाई करीब 800 मीटर होगी। अभी तक हाईवे की चौड़ाई 30 मीटर है। सर्विस रोड मिलाकर हाईवे को 50 मीटर चौड़ा बनाया जाएगा। इससे हाईवे पर वाहन चालकों को आवागमन में आसानी होगी।
अधिग्रहण के बाद शुरू होगा काम
दोनों चौराहों पर बनने वाले ओवरब्रिज के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। दोनों ओवरब्रिज के निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सर्वे के बाद जिला प्रशासन की ओर से मुआवजा बांटा जाएगा। ओवरब्रिज बनने से जाम की समस्या से राहत मिल जाएगी।
-संभव सिंह, साइट इंजीनियर, एनएचएआई
