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– अयोध्या में हादसे के बाद गंभीर हालत में केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया था बस कंडक्टर

माई सिटी रिपोर्टर

लखनऊ। केजीएमयू के ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने बेहद जटिल सर्जरी कर एक मरीज को नया जीवन दिया है। अयोध्या में हुए हादसे के बाद कौशांबी निवासी बस कंडक्टर के सीने में लोहे की रॉड आरपार हो गई थी। इसकी वजह से मरीज के फेफड़े व उसकी बाहरी दीवार (डायफ्रॉम) फट गई थी। तिल्ली, आंत समेत दूसरे अंगों को गंभीर नुकसान हुआ था। विभाग के डॉक्टरों ने न सिर्फ इस जटिल सर्जरी को अंजाम दिया बल्कि उसके लिए खून का बंदोबस्त भी खुद किया।

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष और ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संदीप तिवारी ने बताया कि अयोध्या के पास 22 जून की रात हुए हादसे के बाद मरीज को शुक्रवार तड़के यहां भर्ती किया गया था। हादसे में उसके सीने में लोहे की रॉड आरपार हो गई थी। पुलिसकर्मी उसे गंभीर हालत में भर्ती कराकर वापस चले गए थे। उस समय मरीज के साथ कोई परिवारीजन मौजूद नहीं था। मरीज की हालत गंभीर थी, इसलिए मौके पर मौजूद डॉ. समीर मिश्रा और डॉ. नरेंद्र कुमार की टीम ने जरूरी जांच कर ऑपरेशन करने का फैसला किया। करीब तीन घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद सीने में आरपार हुई रॉड को निकाल दिया गया। रॉड निकालने के बाद उसे वेंटिलेटर पर डालना पड़ा। 23 जून की सुबह उसकी हालत में सुधार होने पर वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा लिया गया।

कम हो गया था ऑक्सीजन का स्तर

डॉक्टरों ने बताया कि घटना के बाद अयोध्या के बीकापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज मुहैया कराया था, लेकिन खून ज्यादा बहने की वजह से वह बेहोश हो गया था। उसके ऑक्सीजन का स्तर भी बेहद कम हो गया था, इसलिए तुरंत ऑपरेशन शुरू किया गया। रॉड निकालने के बाद क्षतिग्रस्त अंगों को दुरुस्त किया गया। मरीज की हालत में सुधार होने के बाद जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।



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