
संजय शेरपुरिया।
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महाठग संजय राय शेरपुरिया के खिलाफ एसटीएफ की जांच रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। एसटीएफ ने उसके करीबियों और कंपनियों के निदेशको को नोटिस देकर तलब किया था, हालांकि उन्होंने जांच एजेंसी से दूरी बनाए रखी है। साथ ही, संजय राय शेरपुरिया की जालसाजी का शिकार हुए उद्योगपति गौरव डालमिया भी एसटीएफ के नोटिस के बावजूद अपना बयान दर्ज कराने प्रस्तुत नहीं हुए है।
वहीं, दूसरी ओर ईडी की जांच पूरी होने की कगार पर है और जल्द ही शेरपुरिया के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ भी अब ईडी की तरफ से अदालत में आरोप पत्र दाखिल होने का इंतजार कर रही है। आरोप पत्र में शेरपुरिया के साथ जिन लोगों को दोषी ठहराया जाएगा, एसटीएफ उन सभी पर कानूनी शिकंजा कसेगी। इन सभी को सम्मन भेजकर तलब किया जाएगा। बता दें कि इस प्रकरण में एसटीएफ ने संजय राय शेरपुरिया और उसके एजेंट कासिफ को गिरफ्तार किया था। तत्पश्चात दोनों को ईडी ने भी गिरफ्तार कर रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। जांच में सामने आया है कि बैंकों से लोन के रूप में ली गई रकम को शेरपुरिया ने अपनी कंपनियों के जरिए कई शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया है। जांच में दिल्ली के चांदनी चौक के एक व्यापारी को भी ठगने के प्रमाण ईडी को मिले हैं, जिसके बारे में एसटीएफ भी पता लगा रही है।
ईडी की चार्जशीट के आधार पर एसटीएफ कसेगी आरोपियों पर शिकंजा
महाठग संजय राय शेरपुरिया के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अदालत में चार्जशीट दाखिल करने के बाद एसटीएफ बाकी आरोपियों पर शिकंजा कसेगी। एसटीएफ ने शेरपुरिया के करीबियों, कंपनियों के निदेशक और उद्योगपति गौरव डालमिया को नोटिस देकर तलब किया था, हालांकि उन्होंने जांच एजेंसी से दूरी बनाए रखी। अब एसटीएफ ईडी की चार्जशीट के आधार पर आरोपियों को सम्मन देकर तलब करेगी।
बता दें कि शेरपुरिया के खिलाफ ईडी की जांच पूरी होने की कगार पर है। जल्द ही शेरपुरिया के खिलाफ दिल्ली की अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया जाएगा। आरोप पत्र में शेरपुरिया के साथ जिन लोगों को दोषी करार दिया जाएगा, एसटीएफ उन सभी पर कानूनी शिकंजा कसेगी। वहीं दूसरी ओर एसटीएफ ने शेरपुरिया की जालसाजी का शिकार बने दिल्ली के चांदनी चौक के व्यापारी के बारे में भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। बता दें कि एसटीएफ ने संजय राय शेरपुरिया और उसके एजेंट कासिफ को अप्रैल माह में गिरफ्तार किया था। तत्पश्चात दोनों को ईडी ने कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। जांच में सामने आया है कि बैंकों से लोन के रूप में ली गई रकम को शेरपुरिया ने अपनी कंपनियों के जरिए कई शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया है।
