Lucknow News: Banks showed stinginess in giving loans to farmers and poor.

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

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बैंकों ने पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किसानों और गरीबों को कर्ज देने में कंजूसी बरती है। बैंकिंग शाखाओं के नेटवर्क में भी बदलाव किया गया है। ग्रामीण इलाकों में शाखाओं का विस्तार हुआ है, तो दूसरी तरफ शहरों और अर्धशहरी इलाकों में इनकी संख्या कम की गयी है। सबसे ज्यादा कटौती अर्ध शहरी इलाकों में की गई है। पिछले सितंबर माह को प्रदेश में कुल 19348 बैंक शाखाएं थी, जो इस वर्ष घटकर 19186 रह गई हैं।

राज्यस्तरीय बैंकर्स कमेटी द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों ने पिछले एक साल में कृषि क्षेत्र में दी जाने वाली लोन की कुल हिस्सेदारी लगातार कम की है। तीस सितंबर 2022 को कुल कर्ज में कृषि क्षेत्र का प्रतिशत 25.58 फीसदी था, जो 31 मार्च 2023 को घटकर 24.43 प्रतिशत रह गया। 30 सितंबर 2023 तक यह हिस्सेदारी और भी घट गई और 22.96 फीसदी पर आ गई।

इसी तरह कमजोर वर्गों को दिए जाने वाले कर्ज में भी बैंकों ने कंजूसी दिखाई है। इसमें भी लगभग ढाई फीसदी की कटौती की गयी है। लघु उद्योगों के कर्ज की हिस्सेदारी लगभग समान है। बैंकों का सबसे ज्यादा फोकस अन्य प्राथमिकता वाले सेक्टर पर रहा है। इसमें उन्होंने जबर्दस्त बढ़ोतरी की है। पिछले साल 30 सितंबर को बैंकों के कुल कर्ज में से प्राथमिकता प्राप्त सेक्टर की हिस्सेदारी महज 0.32 प्रतिशत थी, जो इस वर्ष 30 सितंबर को बढ़ाकर 13.59 फीसदी हो गई।

बैंकों में जमा राशि करीब दो लाख करोड़ रुपये

प्रदेश के बैंकों में पिछले एक साल में जमा राशि में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। पिछले साल 30 सितंबर को प्रदेश के सभी बैंकों में कुल 14.31 लाख करोड़ रुपया जमा था, जो इस साल 30 सितंबर को बढ़ाकर 16.41 लाख करोड़ रुपये हो गया। बैंकों ने पिछले एक साल में 17 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ज्यादा बांटा है।

पिछले सितंबर तक जहां 7.5 लाख करोड़ रुपये कर्ज यूपी में बांटा गया था। इस साल सितंबर माह तक यह आंकड़ा 9.26 लाख करोड़ रुपये हो गया। बीते एक साल में बैंकों ने अपनी शाखाओं में भी कटौती की है। ग्रामीण इलाकों के बैंकों की संख्या 8618 से बढ़कर 8765 हो गई है। वही अर्ध शहरी इलाकों में बैंकों की संख्या 4426 से घटकर 4385 रह गई है। शहरी और मेट्रो इलाकों में बैंक शाखाएं पहले 6300 थी, जो अब घटकर 6036 रह गई हैं।



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