संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ

Updated Wed, 14 Jun 2023 11:54 PM IST

रायबरेली। सरकार की स्थानांतरण नीति जिले में स्वास्थ्य विभाग में तैनात चिकित्सकों पर बेअसर है। कई चिकित्सक 25-25 साल से जिले में ही जमे हैं। प्रमोशन के बाद संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी हो गए हैं, लेकिन सीएचसी की कुर्सीं पर कुंडली मारे बैठे हैं। महराजगंज सीएचसी से हटाए गए अधीक्षक भी करीब 24 साल से जिले में ही कार्यरत हैं। इनका भी प्रमोशन संयुक्त निदेशक के स्तर के अधिकारी के पद पर होने के बाद भी सीएचसी अधीक्षक पर मौज उड़ा रहे थे।

वर्तमान समय में जिला जेल के अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. सुनील अग्रवाल और ऊंचाहार सीएचसी के अधीक्षक डॉ. मनोज शुक्ला करीब 25-25 साल से जिले में ही तैनात हैं। महराजगंज के अधीक्षक पद से डिप्टी सीएम के आदेश पर हटाए गए डॉ. राधाकृष्ण भी 24 साल से जिले में ही काम कर रहे हैं। प्रमोशन होने के बाद भी सलोन में ही मौज काट रहे डॉ. पीके बैसवार भी 20 साल की सेवा जिले को दे चुके हैं। वर्तमान में जिला कुष्ठ रोग अधिकारी के पद पर काम कर रहे एसीएमओ डॉ. राम बहादुर 21 साल और बछरावां के सीएचसी अधीक्षक डॉ. एके जैसल 10 से से जिले में जमे हैं। एसीएमओ डॉ. श्रीकृष्णा व डॉ. एके चौधरी भी 18-18 साल से जिले में ही जमे हैं।

डॉक्टरों को स्थानांरित करने का सरकार ने कई बार प्रयास किया, लेकिन कहीं न कहीं कोई जुगाड़ लगाकर ये चिकित्सक तबादले की सूची से बाहर रह गए। बछरावां सीएचसी में कई वर्षों से मौज काट रहे डॉ. जैसल की मनमानी डिप्टी सीएम, अपर निदेशक सहित अन्य अधिकारियों ने निरीक्षण में पकड़ी, लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ा। चिकित्सक पहले की तरह की मौत उड़ा रहे हैं। सभी का प्रमोशन हो चुका है, लेकिन न जाने विभाग की सबसे नीचे वाली कुर्सी से ही इन चिकित्सकों का मोह भंग क्यों नहीं हो रहा है। हालांकि डिप्टी सीएम के आदेश पर एक अधीक्षक को हटाए जाने के बाद मामला गरमा गया है।



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