रायबरेली। खरीफ की फसलों की रोपाई और बोवाई के पहले ही किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। जिले की 435 नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। नहरों में धूल उड़ रही है। ऐसे में जिले के साढ़े चार लाख किसान धान की रोपाई के लिए बेड़न नहीं डाल पा रहे हैं। यह हाल तब है, जब जुलाई तक धान की रोपाई होनी चाहिए। लगभग धान की बेड़न तैयार होने में एक माह का समय लगता है।
जिले में खरीफ की फसल का सीजन शुरू हो गया है। खासकर धान की रोपाई की जानी है। इस साल डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को धान की बेड़न डालने के लिए 435 नहरों में पानी आने का इंतजार है, जो सूखी पड़ी हैं। समय से धान की नर्सरी नहीं डाली गई तो उत्पादन में असर पड़ेगा। इसके अलावा पानी के अभाव में उर्द, मूंग, अरहर की फसल सूख रही है। यही हाल रहा तो धान का उत्पादन घट जाएगा।कृृषि विभाग के अधिकारी धान की नर्सरी डालने का अनुकूल समय 15 जून तक है। इसके बाद में नर्सरी डालने पर रोपाई विलंब से होती है।
जिले में छोटी और बड़ी 435 नहरें हैं, जिनकी लंबाई करीब 2200 किलोमीटर है। ज्यादातर किसान नहरों के पानी से धान की रोपाई और नर्सरी डालते हैं। जिन किसानों के पास निजी नलकूप की सुविधा है, वह लोग तो किसी तरह धान की नर्सरी डाल चुके हैं, लेकिन जिन किसानों के पास सिंचाई का मुख्य जरिया नहर का पानी है, उनके सामने नर्सरी डालने का संकट है। इन नहरों में पानी शारदा सहायक नहर और डलमऊ पंप कैनाल से आता है।