Lucknow: Woman asked for compensation for having a child despite sterilization, court said- CMO should look in

कोर्ट का फैसला।
– फोटो : istock

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सीतापुर की एक महिला ने नसबंदी के बावजूद बच्चा होने पर ब्याज समेत मुआवजा दिलाने की गुहार की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महिला की याचिका पर सीतापुर के सीएमओ मुआवजे के दावे पर गौर कर चार हफ्ते में इसे समुचित प्राधिकारी को भेजने का आदेश दिया है।

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न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश सीतापुर की महिला की याचिका पर दिया। याची महिला का कहना था कि उसने चार बच्चे होने पर वर्ष 2019 में मछरेहटा सामुदायिक केंद्र पर नसबंदी कराई थी। इसके बावजूद 2021 में पांचवें बच्चे को जन्म दिया। इस तरह नसबंदी ऑपरेशन फेल होने पर महिला ने 12 फीसदी ब्याज के साथ मुआवजा दिलाए जाने का आग्रह किया। 

इसके लिए उसने नेशनल हेल्थ मिशन की ओर से शुरू की गई परिवार नियोजन इंडेमिनिटी योजना में अर्जी दी। याची का कहना था कि अर्जी पर गौर न किए जाने पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुआवजे की गुहार की।उधर, सरकारी वकील ने कहा कि सीएमओ ने महिला की अर्जी को परिवार नियोजन के महानिदेशक को भेजा था। लेकिन, अर्जी में दो दस्तावेज गायब होने पर मुआवजे का दावा नहीं मंजूर हुआ।

कोर्ट ने मछरेहटा सामुदायिक केंद्र के अधीक्षक को निर्देश दिया कि तीन सप्ताह में याची के दावे की अर्जी के साथ पूरे दस्तावेज सीएमओ को भेजें। कोर्ट ने कहा कि सीएमओ मुआवजे के दावे का परीक्षण कर चार हफ्ते में संबंधित प्राधिकारी को इसे भेजेंगे। इस आदेश के साथ कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दी।



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