बदायूं शहर में स्थित भगवान शिव का बिरुआबाड़ी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। 150 साल से अधिक पुराना यह मंदिर आस्था के साथ अपनी सुंदरता और भव्यता के लिए भी पहचाना जाता है। सावन माह और महाशिवरात्रि पर यहां रोजाना हजारों शिवभक्त जलाभिषेक कर मनौती मांगते हैं।

मंदिर के मुख्य पुजारी अभिन्यु पांडेय ने बताया कि इस जगह पर 150 साल से पहले बिरुआ नाम का एक माली खेती करता था। एक बार वह अपने खेत को जोत रहा था, तब उसका हल एक जगह अटक गया। कई बार हल अटका तो उसने सोचा कि देखा जाए अन्दर क्या है। उसने फावड़ा से खोदना शुरू किया। खोदाई करते समय फावड़ा शिवलिंग पर लगा, जिसका निशान आज भी शिवलिंग पर है। उसके बाद बिरुआ माली ने वहां पर मठिया बनाकर स्थानीय लोगों के साथ पूजा- अर्चना शुरू कर दी। पुजारी ने बताया कि बुजुर्गों के अनुसार साल 1932 में माली ने इस मठिया की जिम्मेदारी लाला हरसहायमल श्यामलाल सराफ को सौंप दी। इसके बाद 1984 में मंदिर को वृहद रूप देते हुए इसका जीर्णोद्धार शुरू कराया गया। तब से मंदिर को बिरुआ माली के नाम पर इसे बिरुआबाड़ी मंदिर कहा जाने लगा।

आकर्षण का केंद्र हैं मंदिर में स्थापित प्रतिमाएं 

बिरुआबाड़ी मंदिर में श्री राम दरबार, शिव परिवार, कृष्ण, बाला जी दरबार, हनुमान जी, बांके बिहारी सहित 11 भव्य दरबार स्थापित हैं। इसके साथ ही मंदिर में ही गीता भवन बना हुआ है। वहां पर अर्जुन का गीता का उपदेश देते हुए भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमा भी स्थापित है। मंदिर के बीचोंबीच शिवलिंग स्थापित है, जिसमें रोजाना सैकड़ों लोग पूजा करने आते हैं। सावन के माह और महाशिवरात्रि में यहां पर जलाभिषेक करने के लिए लंबी- लबी कतारें लग जाती हैं। यहां प्रत्येक देवी- देवता के स्थापना को वार्षिकोत्सव मनाया जाता है। इसके साथ ही भाद्रपद माह में जन्माष्टमी पर मेला लगता है तब बाहर से बहुत लोग उसमें शामिल होते हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *