Many colors of love seen in Kasap

नाटक कसप का मंचन करते कलाकार।

लखनऊ। कुमाऊंनी में एक शब्द है ‘कसप’ जिसका अर्थ होता है ‘क्या मालूम’। ऐसी ही अनिश्चितताओं को समेटे एक असफल प्रेम कहानी पर आधारित नाटक कसप का मंचन रविवार शाम एसएनए में किया गया।

मनोहर श्याम जोशी द्वारा लिखित और पुरुषोत्तम शाक्य द्वारा निर्देशित नाटक कसप में नायक एक संघर्षशील साहित्यकार और अनाथ देवीदत्त उर्फ डीडी है। मुंबई फिल्म जगत में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे डीडी को अल्मोड़ा पहाड़ों की रहने वाली एक अल्हड़ लड़की, बेबी उर्फ मैत्रेय से प्रेम हो जाता है। शुरुआती सामाजिक अड़चनों के बाद बेबी के पिता इस शादी के लिए राजी भी हो जाते हैं।

इसी बीच देवीदत्त, बेबी से बेवफाई कर एक खूबसूरत फ्रांसीसी प्रोड्यूसर गुलनार के चक्कर में पड़कर अमेरिकी विश्वविद्यालय में दाखिले की योजना बनाने लगता है। बेबी का दिल टूट जाता है और वो रिश्ता खत्म कर देती है। अपनी बाकी की जिंदगी वह विदुषी मैत्रेय की तरह किताबों संग गुजारती है। दुखांत से भरे इस नाटक ने दर्शकों को भावुक कर दिया। मंच पर अदाकारों में ज्योति पांडेय, पुरुषोत्तम शाक्य, चारू शुक्ला, ओशन वत्स, काजल वर्मा, अनुपम मल्होत्रा, हर्ष पाल, सोनी पाल, पंकज कश्यप, मानसी जायसवाल के अभिनय को दर्शकों ने सराहा।



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